कोर्ट का आदेश्ा, नहीं होगी शोपियां मामले की जांच
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जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने बुधवार को साल 2009 में शोपियां जिले में दो युवतियों की मौत के मामले की फिर से जांच का आदेश देने से इंकार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ एक सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट नए सिरे से जांच के आदेश का आधार नहीं हो सकती।
मुख्य न्यायाधीश एमएम कुमार और खंडपीठ न्यायाधीश डीएस ठाकुर ने कहा कि जैन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट फैसला देने के लिए बाध्य नहीं है।
क्या था मामला
खंडपीठ ने कल दिए अपने आदेश में कहा कि जांच आयोग की रिपोर्ट ऐसे सबूत पर आधारित है जो सीबीआई द्वारा की गई जांच में नहीं आए हैं।
शोपियां की रामबियारा नदी से 30 मई, 2009 को दो युवतियों नीलोफर और 17 साल की आसिया के शव बरामद किए गए थे।
इसके बाद आरोप लगे थे कि सुरक्षा बलों ने दोनों के साथ दुष्कर्म किया और हत्या की है। इसको लेकर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
सरकार ने मामले की जांच के लिए किया था आयोग का गठन
सरकार ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मुजफ्फर जान के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था। आयोग ने इस मामले की जांच कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी।
आयोग ने इस मामले में साजिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि टखने तक पानी में किसी का डूबना असंभव है। राज्य सरकार ने सितम्बर, 2009 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
सीबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इन युवतियों के साथ बलात्कार नहीं हुआ और न ही उनकी हत्या की गई। एजेंसी ने कहा कि दोनों की मौत डूबने से हुई थी।