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J&K:जैश-ए-मोहम्मद के 24 आतंकी घाटी में घुसे, सुरक्षा एजेंसियों की उड़ी नींद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 01 Jun 2018 02:21 PM IST
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जैश-ए-मोहम्मद के लगभग दो दर्जन आतंकियों के एक नए ग्रुप के पीर पंजाल स्थित नियंत्रण रेखा से होते हुए कश्मीर घाटी में घुसने के इनपुट मिले हैं। इसने सुरक्षा एजेंसियों सहित काउंटर इंसरजंसी ग्रिड की नींद उड़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार घुसपैठिए विभिन्न समूहों में विभाजित हो कर दक्षिण कश्मीर के त्राल, शोपियां और पुलवामा क्षेत्रों में छिपे हुए हैं। माना जा रहा है कि नए घुसपैठिए बहुत ट्रेंड और आधुनिक हथियारों से लैस हैं।
दक्षिण कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पुलवामा जिले में 11 नए जैश आतंकवादियों की उपस्थिति की पुष्टि की है। पुलिस के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार 10-11 जैश आतंकवादी पुलवामा में सक्रिय हैं। करीब 7-8 आतंकियों ने त्राल में डेरा डाला है।
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अवंतीपोरा पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि नया समूह त्राल में प्रवेश कर चुका है या नहीं, लेकिन हालिया आतंकी हमलों में निश्चित रूप से जैश की भागीदारी है।
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सूत्रों के अनुसार घुसपैठिए विभिन्न समूहों में विभाजित हो कर दक्षिण कश्मीर के त्राल, शोपियां और पुलवामा क्षेत्रों में छिपे हुए हैं। माना जा रहा है कि नए घुसपैठिए बहुत ट्रेंड और आधुनिक हथियारों से लैस हैं।
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दक्षिण कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पुलवामा जिले में 11 नए जैश आतंकवादियों की उपस्थिति की पुष्टि की है। पुलिस के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार 10-11 जैश आतंकवादी पुलवामा में सक्रिय हैं। करीब 7-8 आतंकियों ने त्राल में डेरा डाला है।
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अवंतीपोरा पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि नया समूह त्राल में प्रवेश कर चुका है या नहीं, लेकिन हालिया आतंकी हमलों में निश्चित रूप से जैश की भागीदारी है।
सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता अभी 17वीं रमजान यानी कि इस्लाम की बद्र की लड़ाई की सालगिरह है, जो इसी सप्ताह शनिवार को आने वाली है। बद्र की लड़ाई की सालगिरह के अवसर पर बड़े पैमाने पर हमले की आशंका ने सुरक्षा ऐजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
बताया जा रहा है कि गत वर्ष भी आतंकियों ने इस अवसर पर दक्षिण से उत्तरी कश्मीर तक बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया था, जिनकी जिम्मेदारी जैश ने ली थी।
जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार की ओर से घोषित एक तरफा सीजफायर का पाकिस्तान की संयुक्त जिहाद परिषद ने स्वागत किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर उस पहल का आतंकवादी घटनाओं पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
कश्मीर घाटी के दक्षिणी जिलों में सक्रिय आतंकियों ने सीजफायर की घोषणा के बावजूद सुरक्षा बलों पर हमलों को नहीं रोका है। हालांकि इन हमलों ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन दो मौकों पर सेना को नुकसान पहुंचा है और एक नागरिक की मौत भी हुई थी।