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J&K USBRL First Inspection: रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय, कटड़ा-बनिहाल ट्रैक पर हाई-स्पीड परीक्षण सफल
Wed, 08 Jan 2025 03:55 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Wed, 08 Jan 2025 03:55 PM IST
सार
भारतीय रेलवे ने कटड़ा से बनिहाल तक चुनौतीपूर्ण 180-डिग्री चढ़ाई पर 110 किमी/घंटा की रफ्तार से सफल परीक्षण किया, जो यूएसबीआरएल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और कश्मीर तक सीधी रेल सेवाओं के मार्ग को सुगम बना दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
विस्तार
जम्मू और कश्मीर के कटड़ा से बनिहाल तक यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट के तहत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सफल 180-डिग्री चढ़ाई पर उच्च गति परीक्षण के साथ भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा गया। उत्तर रेलवे सुरक्षा आयुक्त दिनेश चंद देशवाल ने इस घटना को भारतीय रेलवे के लिए सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि इससे कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच सीधी रेल सेवा शुरू करने की संभावना तेज हो सकती है। उन्होंने कहा कि दो दिन की वैधानिक निरीक्षण प्रक्रिया के बाद एकत्रित डेटा का विश्लेषण किया जाएगा, जिसके बाद केंद्र सरकार इस बहुप्रतीक्षित सेवा के शुरू होने के संबंध में निर्णय ले सकती है।
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पत्रकारों से बात करते हुए दिनेश चंद देशवाल ने कहा कि कटड़ा से बनिहाल तक 180-डिग्री चढ़ाई पर 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाला परीक्षण सफल रहा और यह रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने कटड़ा स्टेशन से सुबह 10:30 बजे रवाना होकर बनिहाल स्टेशन तक डेढ़ घंटे में यात्रा की। वापसी की यात्रा में यह ट्रेन 2 बजे कटड़ा के लिए रवाना होकर 3:30 बजे अपने गंतव्य पर पहुंचेगी। देशवाल ने कहा कि यह परीक्षण यात्रा ट्रैक पर अंतिम उच्च गति परीक्षण है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस परियोजना के शुरू होने पर अंतिम निर्णय लेगी।
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इससे पहले, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिसंबर में रियासी-कटड़ा खंड के पूरा होने की घोषणा की थी। जो कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण विकास है। इस परियोजना का शुभारंभ 1997 में हुआ था और विभिन्न भौगोलिक, जलवायु और तकनीकी चुनौतियों के कारण इसे कई बार समय सीमा का सामना करना पड़ा।
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भारतीय रेलवे ने कटड़ा से बनिहाल तक चुनौतीपूर्ण 180-डिग्री चढ़ाई पर 110 किमी/घंटा की रफ्तार से सफल परीक्षण किया, जो यूएसबीआरएल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और कश्मीर तक सीधी रेल सेवाओं के मार्ग को सुगम बना दिया।