जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने मसर्रत पर लगा PSA किया रद्द
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अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की जन सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई गिरफ्तारी को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। मसर्रत आलम के वकील मियां अब्दुल कयूम के अनुसार जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतार ने 45 वर्षीय मसर्रत आलम की पीएसए के तहत कैद को रद्द कर दिया है।
मसर्रत आलम को 17 अप्रैल को हिरासत में लिया गया था। नई दिल्ली से लौट रहे हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के स्वागत में आयोजित रैली के दौरान पाकिस्तानी झंडा फहराने और देश विरोधी नारेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
अलगाववादी नेताओं सहित मसर्रत के खिलाफ अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रीवेंशन एक्ट की धारा 13 के अलावा आरपीसी की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मसर्रत पर 31 बार पीएसए लगाया गया
इससे पूर्व वर्ष 2010 से कैद में रहे मसर्रत आलम को नौ मार्च को रियासत में नई गठबंधन सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती ने मसर्रत की रिहाई के आदेश दिए थे। मसर्रत की रिहाई पर रियासत सहित देश भर में बवाल मच गया था।
उधर, मुस्लिम लीग के प्रवक्ता मुहम्मद रफीक गनेई ने दावा किया कि कोर्ट ने मसर्रत की रिहाई का आदेश किया है। कहा कि उन पर 31 बार पीएसए लगाया गया जो लोकतंत्र की सच्चाई को उजागर करता है। ज्ञात हो कि मसर्रत वर्ष 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आया था।
श्रीनगर की ओल्ड सिटी में अलगाववादी नेता गिलानी के लिए बड़ी रैली आयोजित करने के बाद मसर्रत आलम चर्चा में आया था। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोप में उसके बाद से उसने अपने जीवन का ज्यादातर समय जेल में ही बिताया है।