{"_id":"60b0f5c28ebc3efbc93be0a6","slug":"j-k-corona-on-one-side-gmc-s-broken-wheelchairs-and-stretchers-on-the-other-side-increasing-pain-for-patients","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: एक तरफ कोरोना, दूसरी तरफ जीएमसी के टूटे व्हीलचेयर और स्ट्रेचर बढ़ा रहे मरीजों का दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: एक तरफ कोरोना, दूसरी तरफ जीएमसी के टूटे व्हीलचेयर और स्ट्रेचर बढ़ा रहे मरीजों का दर्द
Fri, 28 May 2021 07:23 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Fri, 28 May 2021 07:23 PM IST
सार
तीमारदारों को अपने मरीज इमरजेंसी व अन्य वार्डों में पहुंचाने में हो रही परेशानी।
विज्ञापन
जीएमसी जम्मू
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जीएमसी की इमरजेंसी के बाहर टूटे पड़े स्ट्रेचर और व्हीलचेयर मरीजों का दर्द और बढ़ा रहे हैं। कई व्हील चेयर और स्ट्रेचर के टायर टूट चुके हैं, जिससे तीमारदारों को अपने मरीजों को इमरजेंसी, वार्डों या अन्य यूनिटों में पहुंचाने में कड़ी कसरत करनी पड़ रही है।
हालांकि किसी वीआईपी के पहुंचने पर इन्हीं स्ट्रेचर पर सफेद चादर बिछाने के साथ नई व्हीयल चेयर रख दी जाती है, लेकिन बाद में हालात पहले जैसे ही हो जाते हैं। इमरजेंसी और अन्य वार्डों के लिए तीमारदार व्हीलचेयर और स्ट्रेचर लेने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराशा तब होती है, जब टूटे या खराब टायरों वाले व्हीलचेयर को बार-बार घसीटकर मरीज को ले जाना पड़ता है।
यह भी पढ़ें- जम्मू-श्रीनगर: सचिवालयों में एक से 15 जून तक बदलेगा रोस्टर, प्रशासनिक सचिवों की होगी अदला-बदली
विज्ञापन
खराब स्ट्रेचर पर मरीज को रखकर कई जगह उसे उठाकर ले जाना पड़ता है। इमरजेंसी के बाहर गिनीचुनी ही व्हीलचेयर नजर आती हैं। इससे कई बार तीमारदारों को अपने मरीजों को ले जाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नई इमरजेंसी में लिफ्ट के माध्यम से तीसरी मंजिल तक रिकवरी वार्ड तक खराब व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मरीजों को ले जाते समय तीमारदारों का पसीना निकल जाता है।
विज्ञापन
हालांकि किसी वीआईपी के पहुंचने पर इन्हीं स्ट्रेचर पर सफेद चादर बिछाने के साथ नई व्हीयल चेयर रख दी जाती है, लेकिन बाद में हालात पहले जैसे ही हो जाते हैं। इमरजेंसी और अन्य वार्डों के लिए तीमारदार व्हीलचेयर और स्ट्रेचर लेने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराशा तब होती है, जब टूटे या खराब टायरों वाले व्हीलचेयर को बार-बार घसीटकर मरीज को ले जाना पड़ता है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- जम्मू-श्रीनगर: सचिवालयों में एक से 15 जून तक बदलेगा रोस्टर, प्रशासनिक सचिवों की होगी अदला-बदली
विज्ञापन
खराब स्ट्रेचर पर मरीज को रखकर कई जगह उसे उठाकर ले जाना पड़ता है। इमरजेंसी के बाहर गिनीचुनी ही व्हीलचेयर नजर आती हैं। इससे कई बार तीमारदारों को अपने मरीजों को ले जाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नई इमरजेंसी में लिफ्ट के माध्यम से तीसरी मंजिल तक रिकवरी वार्ड तक खराब व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मरीजों को ले जाते समय तीमारदारों का पसीना निकल जाता है।