60 साल बाद अपने परिवार से मिलेंगे इस्माइल
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देश के बंटवारे के समय इस्माइल मात्र छह साल का था। अखनूर से आगे सीमा पर स्थित गांव खड़ाह में माता-पिता के साथ रहता था। बंटवारे के दंगे फसाद के समय माता-पिता से बिछुड़ गया। अभिभावक पाकिस्तान चले गए। दंगों के बीच इस्माइल एक हिंदू परिवार के हाथ लगा।
उसे वे अपने घर ले गए। पाल पोस कर बड़ा किया। आज इस्माइल 73 साल के हो गए हैं। अब उन्हें पता चला है कि उनके भाई-बहन, चाचा और उनके बच्चे पाकिस्तान में रह रहे हैं। 67 साल के बाद इस्माइल अपने उस परिवार से मिलने को बेताब हैं, जिनकी छवि उनके दिलो-दिमाग में भी नहीं है।
भाई के बच्चे विदेशों में रह रहे हैं। उनके फोन आने शुरू हो गए हैं। वे भी अपने अंकल से मिलने को बेताब हैं। यह कहानी है सैनिक कालोनी में रहने वाले मोहम्मद इस्माइल खटाणा की, जिन्हें चंद दिनों पहले पता चला कि उनका परिवार पीओके स्थित भिंबर के पास बटाला छप्पड़ में रह रहा है।
बंटवारे के दौरान इस्माइल बिछुड़ गया था माता-पिता से
इस्माइल के अनुसार जब वे मात्र छह साल के थे तो अपने परिवार से बिछुड़ गए थे। सूरम सिंह चिब नामक फौजी उसे अपने घर ले गए। उन्होंने उसे पाला। जब वह बड़े हो गए तो नौशेरा आ गए। उसके बाद चिब साहब ने ही उनकी शादी चवद्दी में करवाई।
इसके बाद वे जम्मू आकर रहने लगे। इस्माइल आज भी चिब साहब का अहसान नहीं भूल पाते, जिन्होंने उन्हें नई जिंदगी दी। मोहम्मद इस्माइल के परिवार से मिलने की कहानी भी बड़ी रोचक है। पांच बेटियोें के पिता इस्माइल के जंवाई हाजी नजीर अहमद सियालकोट (पाकिस्तान) में रहने वाले अपने परिवार से मिलने दिसंबर में गए थे।
नजीर ने अपने रिश्तेदारों से अपने ससुर मोहम्मद इस्माइल के पिता साई का जिक्र किया। रिश्तेदारों ने उनकी तलाश की तो पता चला कि इस्माइल के माता-पिता का तो इंतकाल हो गया, लेकिन उनके तीन भाई और तीन बहनों के अलावा चाचा का परिवार बटाला छप्पड़ में रहता है।
माथे के ऊपर चोट के निशान से पहचान हुई
उनसे संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि माता-पिता हमेशा अपने बेटे को याद करते रहते थे, जो हिंदुस्तान में बिछुड़ गया। जब उन्होंने इस्माइल के माथे के ऊपर चोट के निशान का जिक्र किया तो माता-पिता की बताई पहचान सही निकली।
परिवार का पता चलने के बाद इस्माइल के बेटे राज मोहम्मद, अजमत, बहन गुलजार और हाजी नजीर पाकिस्तान गए। वहां वे अपने रिश्तेदारों से मिले। इस्माइल के तीन भाई और तीन बहनों के बच्चे विदेशों में रह रहे हैं। अब वे लगातार फोन पर उनसे संपर्क कर रहे हैं।
इस्माइल ने अब पाकिस्तान जाने के लिए वीजा आवेदन किया है। इस्माइल के अनुसार यह साल उनके जीवन का सबसे अच्छा साल है, जब उन्हें पता चला कि उनके परिवार के लोग जिंदा हैं। अब उनकी एक ही तमन्ना है कि जल्द से जल्द अपने भाई बहनों से मिले। संभवत: अप्रैल में इस्माइल पाकिस्तान जाएंगे।