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कश्मीर जोन के आईजी बोले: घाटी के युवाओं को उकसा रहे हैं कुछ नेता, आतंकियों को ढेर करना मानवाधिकार हनन नहीं
Sat, 01 Jan 2022 12:06 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: विमल शर्मा
Updated Sat, 01 Jan 2022 12:06 AM IST
सार
कश्मीर जोन पुलिस प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि आतंकियों के सफाए को मानवाधिकार उल्लंघन बताने का प्रयास किया जा रहा है। हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच पर असंतोष जताने का हक है लेकिन इसे गलत नहीं ठहरा सकते।
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विजय कुमार आईजी कश्मीर
- फोटो : बासित जरगर
विस्तार
जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर जोन आईजीपी विजय कुमार ने कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं की बयानबाजी पर एतराज जताया है। आईजीपी ने कहा कि कुछ नेता कश्मीरी युवाओं को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों में आम नागरिकों की मौत और सुरक्षाबलों की शहादत को कई नेता सही ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। यह एक तरह से युवाओं को भड़काकर उन्हें तबाह करने जैसा है। ऐसे नेताओं को इस तरह की किसी भी बयानबाजी से परहेज करना होगा।
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हैदरपोरा मुठभेड़ को लेकर आईजीपी ने कहा कि परिजन हों या राजनेता अथवा कोई भी अन्य। सभी के पास किसी भी जांच पर असंतोष व्यक्त करने का अधिकार है। वे एनआईए, सीबीआई या फिर हाईकोर्ट स्तर की जांच की मांग कर सकते हैं, लेकिन पुलिस की जांच को पूरी तरह से गलत ठहराने का अधिकार किसी को नहीं है।
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यह न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है। आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि मीडिया से भी एक वर्ग ने आतंकियों के सफाए को मानवाधिकार उल्लंघन पेश करने का प्रयास किया। विशेष जांच समिति जल्द ही जांच रिपोर्ट के आधार पर चार्जशीट दाखिल करेगी। इसे अदालत देखेगी कि जांच सही है या नहीं।
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आईजीपी ने कहा कि कुख्यात आतंकी और टीआरएफ कमांडर मेहरान की फोटो दिखाकर कहा गया है कि यह बर्बर है, जबकि मेहरान ने कई लोगाें की हत्या की थी। टीआरएफ चीफ अब्बास जैसे आतंकियों से कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। फारूक अब्दुल्ला के बयान पर आईजीपी ने कहा कि फारूक मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
गृह मंत्रालय उन्हीं के अधीन था। वे बेहतर तरीके से पुलिस के कामकाज का तरीका जानते हैं। आईजीपी ने अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी को कश्मीर के हालात से जोड़ने पर आपत्ति जताई। तालिबान का कश्मीर में कोई असर नहीं पड़ने दिया गया है।
खराब नहीं बेहतर हुए हालात
आईजीपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हालात की नब्बे के दशक से तुलना कर बयानबाजी की जा रही है। इन दावों को वह तथ्यों से खारिज करते हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष 238 आतंकी वारदातें हुई थीं, जबकि इस साल 192 आतंकी घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2020 में 37 आतंकी मारे गए थे। इस साल 34 आतंकियों को ढेर किया गया है। बीते वर्ष 167 युवा आतंकी तंजीमों में शामिल हुए थे। इस साल यह आंकड़ा 128 है। इनमें से 30 को आतंकी बनने के तीस दिन में ही मार गिराया गया।
हाइब्रिड आतंकी शब्द पर आपत्ति निराधार
आईजीपी ने कहा कि हाइब्रिड आतंकी की संज्ञा पुलिस की ओर से ही दी गई है। इसे गूगल ने भी स्वीकार किया है। हाइब्रिड आतंकियों को उनके डिटिजल हस्ताक्षर से चिह्नित किया जा रहा है। अभी तक 25 हाइब्रिड आतंकियों की पहचान की गई है।