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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा, हाईकोर्ट ने कहा-ऐसे मामलों को आवश्यक मान कर सुनवाई हो

Sun, 19 Apr 2020 02:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 19 Apr 2020 02:21 AM IST
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High Court said domestic violence cases should be considered necessary for hearing
jammu high court - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन के दौरान महिलाओं तथा बच्चियों पर हो रही घरेलू हिंसा की घटनाओं का जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के सभी कोर्ट को हिदायत दी कि घरेलू हिंसा की घटनाओं को आवश्यक मानते हुए सुनवाई की जाए। कोर्ट ने अधिवक्ता मोनिका कोहली को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है। 

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हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल तथा न्यायाधीश रजनीश ओसवाल ने अपने अपने घर से वीडियो कांफ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि पूरे विश्व में कोरोना महामारी के चलते महिलाओं एवं बच्चों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के समाज कल्याण विभाग के सचिव और जम्मू-कश्मीर स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव को नोटिस जारी किया। 
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इनसे लॉकडाउन के चलते महिलाओं के प्रति होने वाले घरेलू या अन्य किसी प्रकार की हिंसा के संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभिन्न देशों की ओर से अपनाए गए तरीकों का परीक्षण करते हुए दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में उठाए जाने वाले कदमों के संबंध में सुझाव दे। 
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कोर्ट ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के लिए टेली / ऑनलाइन कानूनी और परामर्श सेवा और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान तय किए जाने चाहिए। इसके साथ ही किराने तथा दवा की दुकानों पर शिकायत करने की सुविधा होनी चाहिए। 


इसके साथ ही खाली पड़े होटल, शिक्षण संस्थानों को आश्रय स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव घरेलू हिंसा से जुड़े लंबित मामलों की सूची तैयार करें तथा ऐसे मामलों में महिलाओं की सुरक्षा तथा उनके हितों को सुनिश्चित करें। वे इसके लिए पुलिस की भी सहायता ले सकते हैं। निर्देश दिया कि अगली तारीख पर उठाए जाने वाले कदमों की रिपोर्ट पेश की जाए।

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