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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: अस्थायी कर्मियों को स्थायी करने वाला ट्रिब्यूनल का फैसला हाईकोर्ट ने पलटा,  प्रसार भारती से जुड़े कर्मियों का मामला 

Thu, 14 Apr 2022 03:56 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 14 Apr 2022 03:56 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश के लिए स्टैंडिंग लेबर कमेटी की अनुशंसा को आधार बनाया। इस तरह की अनुशंसा नीति का विकल्प नहीं हो सकती।

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High Court overturned the decision of the tribunal to make temporary workers permanent
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने भारतीय प्रसार भारती प्रसारण निगम में अस्थायी कर्मियों को नियमित करने के केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के फैसले को पलट दिया है। हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश के लिए स्टैंडिंग लेबर कमेटी की अनुशंसा को आधार बनाया, जबकि इस तरह की अनुशंसा नीति का विकल्प नहीं हो सकती। लिहाजा ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज किया जाता है। 

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महानिदेशक ने अस्थायी कर्मियों के नियमितीकरण को गलत बताया था

न्यायाधीश अली मोहम्मद मागरे और न्यायाधीश मोहन लाल ने ट्रिब्यूनल के 10 मई 2019 को जारी आदेश को पलटते हुए कहा कि स्टैंडिंग लेबर कमेटी की सिफारिश किसी नीति के नियम या कानूनी शासन व्यवस्था की जगह नहीं ले सकती। इस मामले में दूरदर्शन के महानिदेशक ने अस्थायी कर्मियों के नियमितीकरण को गलत बताया था, जिस पर ट्रिब्यूनल ने असहमति जताई थी।

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अस्थायी कर्मियों ने मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हालात में काम किया

ट्रिब्यूनल ने कहा था कि कश्मीर में अस्थायी कर्मियों ने मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हालात में काम किया है। ऐसे में उन्हें देश भर के अन्य अस्थायी कर्मियों से अलग देखा जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने प्रोडक्शन सहायक पदों पर अस्थायी सेवाएं देने वाले कर्मियों को नियमित करने के साथ वर्ष 2003 से वरिष्ठता लाभ देने के आदेश दिए थे। 

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ट्रिब्यूनल के इस फैसले से नाखुश होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया 

ट्रिब्यूनल ने आदेश में कहा था कि यह आदेश अन्य स्थानों पर कार्यरत अस्थायी कर्मियों के लिए नियमितीकरण का आधार नहीं हो सकता। ट्रिब्यूनल के इस फैसले से नाखुश प्रसार भारतीय प्रसारण निगम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर दलील दी कि कश्मीर के कर्मियों को देश के अन्य कर्मियों से अलग नहीं माना जा सकता।

अदालतों में याचिकाओं का अंबार लग जाएगा

यदि इस तरह से एक प्रदेश को रियायत दी गई तो देश भर में इस तरह की रियायत के लिए अदालतों में याचिकाओं का अंबार लग जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण के लिए निर्धारित नियम अथवा नीति होना जरूरी है। इससे हटकर किसी भी संस्था या समिति की सिफारिश को नियम और नीति नहीं माना जा सकता।

प्रसार भारती चाहे तो नियमित करने में सक्षम

ट्रिब्यूनल का फैसला पलटने के साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत का यह फैसला प्रसार भारती को कर्मियों के नियमितीकरण से रोक नहीं रहा। प्रसार भारती की ओर से पांच सितंबर 2019 को एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें विभाग में अस्थायी कर्मियों को स्थायी करने का प्रावधान है।

केवल ट्रिब्यूनल के उस आधार को खारिज किया है, जिसका हवाला फैसले में दिया

हाईकोर्ट ने केवल ट्रिब्यूनल के उस आधार को खारिज किया है, जिसका हवाला फैसले में दिया है। यदि अस्थायी कर्मी विभागीय नियमितीकरण प्रावधान के अनुसार योग्य हैं तो प्रसार भारती इस पर फैसला ले सकता है। इसमें कोर्ट का आदेश रोड़ा नहीं बनेगा।

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