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बाढ़: राहत कार्य की धीमी गति पर HC सख्त

Sun, 16 Nov 2014 03:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 16 Nov 2014 03:13 PM IST
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high court ask names of flood victims who don't receive relief material

रियासत में आई बाढ़ आपदा के बाद जम्मू संभाग के कुछ पीड़ित परिवारों को राहत और पुनर्वास मदद नहीं मिलने को लेकर अदालत ने चिंता जताई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर याचिका की सुनवाई करने के बाद डिवीजनल कमिश्नर को दो सप्ताह के अंदर व्यापक रिपोर्ट पेश करने को कहा। याचिकाकर्ता के वकील उन परिवारों के नाम जमा करवाएं, जिन्हें अन्य परिवारों की तरह पर्याप्त राहत नहीं मिली है।

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दो वकील अजय बख्शी और तारिक रसूल ने जनहित याचिका दायर कर अदालत को बताया कि कई परिवारों को राहत नहीं मिल पाई है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पाया कि 20 सितंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी बनाई गई। इसमें चीफ जस्टिस की ओर से वरिष्ठ रजिस्ट्रार और चार अन्य सदस्यों को मनोनीत किया गया। कमेटी को राहत बांटने के संबंध में एक अंतरिम रिपोर्ट पेश करने को कहा गया।
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हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार सुरेश शर्मा को कमेटी का संयोजक बनाया गया, जबकि जम्मू और कश्मीर बार एसोसिएशन के प्रेसीडेंट, आपदा प्रबंधन के निदेशक, केंद्रीय गृह मंत्रालय को नामिनी और प्रदेश राजस्व विभाग के सचिव को कमेटी में शामिल किया गया।
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राजस्व विभाग के सचिव विनोद कौल ने कमेटी की रिपोर्ट में हस्ताक्षर नहीं किए और रजिस्ट्रार जनरल को नौ अक्तूबर 2014 को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने बताया कि रियासत के 21 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए और वह खराब मौसम के कारण कमेटी के साथ पुंछ और राजोरी का दौरा नहीं कर सके। उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से रखी गई 10 अक्तूबर, 2014 की तिथि को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

हालांकि अन्य सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट पेश की और कहा कि बाढ़ पीड़ितों को उचित मुआवजा नहीं मिला। जम्मू, उधमपुर, रियासी, किश्तवाड़ और पुंछ के डीसी ने स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि पीड़ितों को राहत देने के लिए दस अक्तूबर 2014 को दो सौ लाख रुपये जारी किए गए। रिपोर्ट जमा करने के दिन तक सिर्फ 13.29 करोड़ रुपये रिलीज किए जा सके। इसके अलावा प्राप्त राहत सामग्री भी बांटी गई।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाढ़ पीड़ितों को बांटे गए खाद्य पदार्थ भी सरकार के दावों के अनुसार नहीं थे। कमेटी ने सद्दल का भी दौरा किया, जहां नौ सितंबर को पस्सियां खिसकने से 23 लोगों की मौत हो गई और 17 लोग लापता हुए। वकील ने 30 परिवारों की सूची भी अदालत में पेश की, जिसमें या तो उन्हें राहत राशि मिली ही नहीं और कुछ को मिली तो वह नाममात्र थी।


खंडपीठ ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार सतपाल शर्मा, कश्मीर सिंह, पूरण सिंह, संपूर्ण सिंह, सुखदेव सिंह को कोई राहत नहीं मिली, जबकि उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। अदालत ने कहा कि फ्लाएं मंडाल और सतवारी के प्रभावित परिवारों की सूची जमा करवाई जानी चाहिए।
जेएनएफ

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