फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   heavy damage in border villages from pakistani shelling

सालों की मेहनत पर पलभर में पानी फेर देता है पाक

Mon, 25 Aug 2014 10:25 AM IST
Updated Mon, 25 Aug 2014 10:25 AM IST
विज्ञापन
heavy damage in border villages from pakistani shelling

पाकिस्तान की ओर से की जा रही गोलाबारी के कारण अब तक हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षति जगहों पर आश्रय लेना पड़ा रहा है।

विज्ञापन


आजादी के बाद से दर्जनों बार अपने घरों से बेघर हो चुके ग्रामीणों की स्थिति कुछ ऐसी ही है कि वे तिनका-तिनका जोड़कर आशियाना बनाते हैं और पाकिस्तान एक ही पल में उनकी सालों की मेहनत पर पानी फेर देता है।

वैसे अब सीमा के किनारे बसे लोगों के लिए गोलाबारी एक आदत सी बन चुकी है। उन्हें पता है कि हर पांच से छह माह के बाद पाकिस्तान ने उन पर गोलियां बरसानी होती है। इसके लिए वे तैयार ही रहते हैं।
विज्ञापन

दहशत से कड़ी फसलों को नुकसान

heavy damage in border villages from pakistani shelling

पाक गोलाबारी के चलते गांव छोड़कर अवताल स्थित कम्यूनिटी हाल में बैठे सीमांत ग्रामीणों ने बताया कि वर्षो से वे इस पीड़ा को झेल रहे हैं।

स्थानीय निवासी सुभाष चंद्र, रमेश लाल, राज कुमार, राजिंद्र कुमार, रोशन लाल आदि के अनुसार जब-जब भारत-पाक के बीच माहौल खराब हुआ है, उसका खामियाजा सीमावर्ती ग्रामीणों को उठाना पड़ा है। फायरिंग की वजह से कई गांवों के लोग पलायन करने के लिए मजबूर हुए हैं।

फायरिंग बंद होने पर ही गांव में लौटेंगे। उन्होंने कहा कि फसलें बर्बादी की कगार पर हैं। दहशत से किसान खेतों में भी नहीं जा पा रहे। मवेशियों के लिए चारे का भी इंतजाम नहीं कर पा रहे। वहीं राज्य सरकार इन सब बातों से बेखबर बनी हुई है।

सीमांत गांव दग, जेरडा, जस्सोचक, कंदराल, एसएमपुरा, नंगा आदि के लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा पलायन की स्थिति में उनके रहने खाने पीने आदि के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी ने मौके का दौरा कर हाल चाल पूछा है।

सालों से गोली की आवाज के बीच बीत रही जिंदगी

heavy damage in border villages from pakistani shelling

सीमा पर हो रही गोलीबारी से कठुआ के लोगों में भी दहशत व्याप्त है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे गांव लौंडी के लोग कई सालों से गोली की आवाज के बीच जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की व्यथा है कि तारबंदी के बाद से उन्हें जमीनों की ओर जाने ही नहीं दिया गया। समय की पाबंदी और गोली का डर उन्हें बार बार सताता है।

लैंड माइन फटने से 2003 में अपनी एक टांग गवां चुके गांव के 60 वर्षीय हीरा सिंह ने गोली की दहशत को बयां करते हुए बताया कि वह स्वयं और गांव वालों ने 1965, 1971,1986,1998 और 2002 में गांव छोड़ा है। दो बार तो जंग हुई लेकिन इसके बाद तो पाक की हरकतों में बढ़ोत्तरी होती गई और हर बार गोली की आवाज सुनते ही गांव सिहर उठता है।

अब आरएसपुरा में जिस प्रकार से गांव खाली करवाए गए हैं। उससे साफ है कि उन्हें कभी भी गांव खाली करना पड़ सकता है। दहशत का माहौल तो बना ही रहता है लेकिन जब हालात कुछ सामान्य होते हैं तब भी उन्हें गुजर बसर करने में मुश्किल होती है। तारबंदी के पार ग्रामीणों की 300 एकड़ भूमि है लेकिन अब वह बंजर हो चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed