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Jammu Kashmir: प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शब्बीर खान पर छेड़छाड़ केस की सुनवाई अब जम्मू में होगी
Fri, 24 Feb 2023 02:10 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Fri, 24 Feb 2023 02:10 AM IST
सार
न्यायमूर्ति संजय धर ने याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जम्मू की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। सभी पक्षों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 12 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया।
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जम्मू कश्मीर कोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शब्बीर खान पर छेड़छाड़ के मामले में अब आगे की सुनवाई जम्मू में होगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय धर ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीनगर से मामले का स्थानांतरण कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जम्मू में किया है।
याचिकाकर्ता/आरोपी ने मामले को स्थानांतरित करने की मांग संबंधी याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि याचिकाकर्ता एक राजनेता है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण उसकी छवि को खराब करने के लिए प्रतिवादी द्वारा एक मामले में झूठा फंसाया गया है।
शिकायतकर्ता एक अलगाववादी नेता की पत्नी है और घाटी में रहने वाले कुछ वर्गों के लोगों के बीच प्रभाव रखते है। ऐसे उन्हें जान का खतरा है। आवेदन का नोटिस प्रतिवादी के साथ-साथ शिकायतकर्ता को भेजा गया था, लेकिन आपत्ति दर्ज होने के सात साल बाद भी शिकायतकर्ता ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है और न ही आवेदन पर आपत्ति दर्ज की।
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न्यायमूर्ति संजय धर ने आवेदक के वकील रवि अबरोल की दलील के बाद कहा कि जम्मू-कश्मीर सीआरपीसी की धारा 526 का इस्तेमाल करते हुए मामले को जम्मू स्थानांतरण किया गया है। न्यायमूर्ति संजय धर ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता एक अलगाववादी नेता की पत्नी है और घाटी में रहने वाले कुछ वर्गों के लोगों के बीच प्रभाव रखता है।
यह तथ्य है कि कश्मीर घाटी में अभी भी अलगाववादी विचारधारा को न मानने वाले मुख्यधारा के नेताओं और लोगों पर हमले किए जा रहे हैं। इसलिए यह झूठ नहीं होगा कि श्रीनगर में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को जान का खतरा नहीं है।
याचिकाकर्ता का यह तर्क कि श्रीनगर के कम से कम तीन अधिवक्ताओं को अपना मामला लेने को कहा , लेकिन उन्होंने इसमें असमर्थता दिखाई। इसलिए, याचिकाकर्ता की यह आशंका कि उसे श्रीनगर में मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी वह उचित साबित होती है।
न्यायमूर्ति संजय धर ने याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जम्मू की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। सभी पक्षाें को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जम्मू की अदालत में 12 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया। जेएनएफ
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याचिकाकर्ता/आरोपी ने मामले को स्थानांतरित करने की मांग संबंधी याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि याचिकाकर्ता एक राजनेता है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण उसकी छवि को खराब करने के लिए प्रतिवादी द्वारा एक मामले में झूठा फंसाया गया है।
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शिकायतकर्ता एक अलगाववादी नेता की पत्नी है और घाटी में रहने वाले कुछ वर्गों के लोगों के बीच प्रभाव रखते है। ऐसे उन्हें जान का खतरा है। आवेदन का नोटिस प्रतिवादी के साथ-साथ शिकायतकर्ता को भेजा गया था, लेकिन आपत्ति दर्ज होने के सात साल बाद भी शिकायतकर्ता ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है और न ही आवेदन पर आपत्ति दर्ज की।
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न्यायमूर्ति संजय धर ने आवेदक के वकील रवि अबरोल की दलील के बाद कहा कि जम्मू-कश्मीर सीआरपीसी की धारा 526 का इस्तेमाल करते हुए मामले को जम्मू स्थानांतरण किया गया है। न्यायमूर्ति संजय धर ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता एक अलगाववादी नेता की पत्नी है और घाटी में रहने वाले कुछ वर्गों के लोगों के बीच प्रभाव रखता है।
यह तथ्य है कि कश्मीर घाटी में अभी भी अलगाववादी विचारधारा को न मानने वाले मुख्यधारा के नेताओं और लोगों पर हमले किए जा रहे हैं। इसलिए यह झूठ नहीं होगा कि श्रीनगर में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को जान का खतरा नहीं है।
याचिकाकर्ता का यह तर्क कि श्रीनगर के कम से कम तीन अधिवक्ताओं को अपना मामला लेने को कहा , लेकिन उन्होंने इसमें असमर्थता दिखाई। इसलिए, याचिकाकर्ता की यह आशंका कि उसे श्रीनगर में मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी वह उचित साबित होती है।
न्यायमूर्ति संजय धर ने याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जम्मू की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। सभी पक्षाें को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जम्मू की अदालत में 12 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया। जेएनएफ