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Jammu News: मोटापा, उच्च रक्तचाप और गर्भपात का कारण हार्मोंस में बदलाव
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स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.तानिया कक्कड़। अमर उजाला
- जंक फूड और मोबाइल की लत ने अनियमित कर दी माहवारी
- महिलाओं के साथ ही लड़कियों में हार्मोंस हुए अनियंत्रित : डाॅ. तानिया
ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ल
जम्मू। जिस उम्र में बेटियों को खेलना-कूदना चाहिए वह उम्र अब मोबाइल में ढलती जा रही है। ऑनलाइन माध्यम से जंक फूड मंगाकर खाने के बाद घर पर बने भोजन के प्रति अरुचि कहीं न कहीं लड़कियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। महिलाओं के अंदर भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। बेटियों में 10 से 16 वर्ष की उम्र में तेजी से हार्मोंस बदलाव व अनियंत्रित होने से उच्च रक्तचाप, मोटापा सहित डायबिटीज की संभावनाएं घर कर रही हैं। महिलाओं में संस्थागत प्रसव के बजाय सिजेरियन से बच्चा पैदा करने की हसरत जानलेवा साबित हो रही है। यह कहना है श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल जम्मू की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. तानिया कक्कड़ का। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने महिलाओं, बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।
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सवाल : अस्पताल में सामान्य प्रसव व सिजेरियन प्रसव का क्या आंकड़ा है। यहां की महिलाओं की रुचि किस तरह देखी जा रही है?
जवाब : जम्मू में यह एक अच्छी बात है कि महिलाएं प्रसव को लेकर काफी गंभीर हैं। इसमें यहां का सामाजिक माहौल उनको नार्मल डिलीवरी के लिए प्रेरित करता है। यह सुखद बात है कि रोज अस्पताल में यदि 42 सामान्य प्रसव होते हैं तो 32 की संख्या ही सिजेरियन से बच्चे पैदा होने की है।
सवाल : सिजेरियन प्रसव से बच्चा पैदा होने के बाद महिला के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। दूसरे बच्चे के समय क्या सावधानियां रखनी पड़ती हैं?
जवाब : हर स्थिति में किसी भी महिला के लिए सिजेरियन प्रसव स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं कहा जा सकता। ऑपरेशन के बाद महिला कमजोर हो जाती है। उसके खानपान पर ध्यान न दिया गया तो दूसरे बच्चे के समय सामान्य प्रसव की संभावना न के बराबर होती है। हार्मोंस में बदलाव के कारण माहवारी चक्र में परिवर्तन भी हो सकता है इसलिए कोशिश की जानी चाहिए कि सामान्य प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़े।
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सवाल : कम उम्र की बेटियों में समय से पहले ही शारीरिक बदलाव, माहवारी चक्र में अनियमितता हो रही है। क्या यह स्वास्थ्य के लिए खतरा है?
जवाब: स्कूल जा रही बेटियों के अंदर जंक फूड के सेवन के बाद जीवनशैली में बदलाव नजर आ रहा है। इसका असर उनके स्वास्थ्य, शारीरिक संरचना पर दिखाई दे रहा है। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे संकेत नहीं हैं। हर माह आने वाली माहवारी में अनियमितता उनको उच्च रक्तचाप, पढ़ाई के दबाव के बीच मोटापा बढ़ने व डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी के चपेट में ले रही है। इससे बचने के लिए नियमित व्यायाम व उचित पौष्टिक भोजन करने की जरूरत है।
सवाल : मोटापा व डायबिटीज की समस्या से किसी महिला के जीवन में क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर: किसी भी महिला के लिए मोटापे की समस्या के साथ ही डायबिटीज तो खुद ही चलकर आ जाती है। यदि सावधानी न रखी तो बच्चे को कंसीव करने के बाद गर्भपात होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हार्ट से संबंधित बीमारियों, ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में कोशिश यही होनी चाहिए कि बच्चा जब ठहर जाए तो नियमित व्यायाम तो करना ही है। पहले से ही यदि इसके लिए जागरूकता रहेगी तो सामान्य प्रसव में कठिनाई नहीं होगी।
सवाल : हार्मोंस में बदलाव के बाद अनियमित माहवारी की समस्या से सबसे अधिक पीड़ित महिलाएं हैं या लड़कियां?
जवाब : ओपीडी में खानपान में अनियमितता, तनाव के बीच बड़ी संख्या में महिलाएं व लड़कियां आ रही हैं। सबसे चिंता वाली बात यह है कि इनमें यदि दो महिलाएं हैं तो छह लड़कियां दिखाने आ रही हैं। इन सभी में माहवारी की अनियमितता, तनाव, जंक फूड के सेवन से मोटापे की समस्या आम है। इन सभी लक्षणों के प्रति ध्यान न दिया गया तो यह आने वाले दिनों में महामारी का रूप ले सकता है।
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- महिलाओं के साथ ही लड़कियों में हार्मोंस हुए अनियंत्रित : डाॅ. तानिया
ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ल
जम्मू। जिस उम्र में बेटियों को खेलना-कूदना चाहिए वह उम्र अब मोबाइल में ढलती जा रही है। ऑनलाइन माध्यम से जंक फूड मंगाकर खाने के बाद घर पर बने भोजन के प्रति अरुचि कहीं न कहीं लड़कियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। महिलाओं के अंदर भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। बेटियों में 10 से 16 वर्ष की उम्र में तेजी से हार्मोंस बदलाव व अनियंत्रित होने से उच्च रक्तचाप, मोटापा सहित डायबिटीज की संभावनाएं घर कर रही हैं। महिलाओं में संस्थागत प्रसव के बजाय सिजेरियन से बच्चा पैदा करने की हसरत जानलेवा साबित हो रही है। यह कहना है श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल जम्मू की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. तानिया कक्कड़ का। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने महिलाओं, बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल : अस्पताल में सामान्य प्रसव व सिजेरियन प्रसव का क्या आंकड़ा है। यहां की महिलाओं की रुचि किस तरह देखी जा रही है?
जवाब : जम्मू में यह एक अच्छी बात है कि महिलाएं प्रसव को लेकर काफी गंभीर हैं। इसमें यहां का सामाजिक माहौल उनको नार्मल डिलीवरी के लिए प्रेरित करता है। यह सुखद बात है कि रोज अस्पताल में यदि 42 सामान्य प्रसव होते हैं तो 32 की संख्या ही सिजेरियन से बच्चे पैदा होने की है।
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सवाल : सिजेरियन प्रसव से बच्चा पैदा होने के बाद महिला के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। दूसरे बच्चे के समय क्या सावधानियां रखनी पड़ती हैं?
जवाब : हर स्थिति में किसी भी महिला के लिए सिजेरियन प्रसव स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं कहा जा सकता। ऑपरेशन के बाद महिला कमजोर हो जाती है। उसके खानपान पर ध्यान न दिया गया तो दूसरे बच्चे के समय सामान्य प्रसव की संभावना न के बराबर होती है। हार्मोंस में बदलाव के कारण माहवारी चक्र में परिवर्तन भी हो सकता है इसलिए कोशिश की जानी चाहिए कि सामान्य प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़े।
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सवाल : कम उम्र की बेटियों में समय से पहले ही शारीरिक बदलाव, माहवारी चक्र में अनियमितता हो रही है। क्या यह स्वास्थ्य के लिए खतरा है?
जवाब: स्कूल जा रही बेटियों के अंदर जंक फूड के सेवन के बाद जीवनशैली में बदलाव नजर आ रहा है। इसका असर उनके स्वास्थ्य, शारीरिक संरचना पर दिखाई दे रहा है। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे संकेत नहीं हैं। हर माह आने वाली माहवारी में अनियमितता उनको उच्च रक्तचाप, पढ़ाई के दबाव के बीच मोटापा बढ़ने व डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी के चपेट में ले रही है। इससे बचने के लिए नियमित व्यायाम व उचित पौष्टिक भोजन करने की जरूरत है।
सवाल : मोटापा व डायबिटीज की समस्या से किसी महिला के जीवन में क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर: किसी भी महिला के लिए मोटापे की समस्या के साथ ही डायबिटीज तो खुद ही चलकर आ जाती है। यदि सावधानी न रखी तो बच्चे को कंसीव करने के बाद गर्भपात होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हार्ट से संबंधित बीमारियों, ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में कोशिश यही होनी चाहिए कि बच्चा जब ठहर जाए तो नियमित व्यायाम तो करना ही है। पहले से ही यदि इसके लिए जागरूकता रहेगी तो सामान्य प्रसव में कठिनाई नहीं होगी।
सवाल : हार्मोंस में बदलाव के बाद अनियमित माहवारी की समस्या से सबसे अधिक पीड़ित महिलाएं हैं या लड़कियां?
जवाब : ओपीडी में खानपान में अनियमितता, तनाव के बीच बड़ी संख्या में महिलाएं व लड़कियां आ रही हैं। सबसे चिंता वाली बात यह है कि इनमें यदि दो महिलाएं हैं तो छह लड़कियां दिखाने आ रही हैं। इन सभी में माहवारी की अनियमितता, तनाव, जंक फूड के सेवन से मोटापे की समस्या आम है। इन सभी लक्षणों के प्रति ध्यान न दिया गया तो यह आने वाले दिनों में महामारी का रूप ले सकता है।