शहरवासियों को 108 एंबुलेंस का तोहफा जल्द
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कश्मीर घाटी में आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए यहां क्रिटिकल केयर एंबुलेंस की कमी महसूस हो रही है। जब भी कोई सड़क दुर्घटना होती है तो लोग अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
जानकारी के अनुसार दो साल पहले 9 फरवरी, 2012 को राज्य के मुख्यमंत्री ने दिल्ली के एम्स में हुए एक सम्मलेन के दौरान ऐलान किया था। कि राज्य में 108 कंट्रोल रूमों की स्थापना की जाएगी, जो आपातकालीन स्थिति के दौरान सहयोग देने में सक्षम रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि राज्य में कंप्यूटराइज्ड उच्चस्तरीय एम्बुलेंस सुविधा शुरू करने पर भी विचार किया जाएगा, जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर 30 किलोमीटर के बाद उपलब्ध रहेगी।
सरकार के दावे खोखले साबित हुए
लेकिन यह दावे सिर्फ बयानों तक ही सीमित रहे। यही कारण है कि प्रति वर्ष हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार न ही इस प्रकार के किसी कंट्रोल रूम की स्थापना हुई और न ऐसी सुविधा अभी तक शुरू हो पाई है।
डॉक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर के अध्यक्ष डॉ. निस्सार-उल-हस्सन के अनुसार मुख्यमंत्री ने कई बार आश्वासन दिया कि घाटी में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस सुविधा रखी जाएगी, लेकिन कोई भी दावा पूरा नहीं किया गया।
क्यों फिर से उठी एंबुलेंस मांग
बुधवार को श्रीनगर के उमराबाद में हुई सड़क दुर्घटना का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर राजमार्ग पर क्रिटिकल केयर एंबुलेंस की सुविधा होती, तो हो सकता था कि कई लोगों की जान बच जाती।
इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री ताज मोहियुदीन का कहना था कि क्रिटिकल केयर एंबुलेंस की कमी महसूस की जा रही है। जिसके लिए काम तेजी से शुरू हो गया है।
टेंडर नोटिस जारी कर दिए गए हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग निदेशक डॉ. सलीम-उर-रेहमान ने बताया कि पहले फेज में 20 से 25 क्रिटिकल केयर एम्बुलेंस खरीदी जाएगी।