सितंबर में संभव नहीं गुरुद्वारा चुनाव
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सरकार द्वारा 15 सितंबर को राज्य में गुरुद्वारा चुनाव करवाने की अधिसूचना जारी होने के बाद भले ही सिखों में हलचल हो गई है, लेकिन यह चुनाव सितंबर में संभव नहीं हैं।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार अब तक न तो मतदाता सूची संशोधित हो पाई है और न ही नए जिलों का परिसीमन बन पाया है।
नेशनल सिख फ्रंट के चेयरमैन वरिंदरजीत सिंह सरकारी अधिसूचना को सिर्फ ‘आई वाश’ कह रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने सिर्फ कोर्ट की अवमानना से बचने के लिए अधिसूचना जारी की है।
15 जुलाई तक तैयार होनी थी मतदाता सूची
नियमों के अनुसार चुनाव से दो माह पहले अधिसूचना जारी की जानी चाहिए।
यानी
15 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए 15 जुलाई तक मतदाता सूची तैयार हो
जानी चाहिए।
सरकार ने भले ही तमाम जिलों के डीसी को इस संबंध में नोटिस
जारी किया है, लेकिन एक अगस्त तक न तो इस संबंध में कोई कार्यवाही हो पाई
है और न ही किसी डीसी की रिपोर्ट प्राप्त हुई है।
सांबा को अलग दर्जा
इतना ही नहीं, गुरुद्वारा चुनाव के लिए इस बार नए जिलों के आधार पर परिसीमन भी तय किया जाना है। जिसमें सांबा को अलग जिला का दर्जा मिलना है।
लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है कि नए परिसीमन में कौन-कौन से जिले बनेंगे। वरिंदरजीत सिंह कहते हैं, ‘सरकार ने अदालत में स्वीकार किया है कि नए जिलोें के आधार पर चुनाव करवाए जाएंगे।
लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं शुरू हो पाई। यही हाल रहा तो रियासत के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गुरुद्वारा चुनाव संभव ही नहीं हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव के लिए बाकायदा तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।’
बहरहाल, रियासत के सिख 15 सितंबर को होने वाले चुनाव को लेकर पसोपेश में हैं।