{"_id":"5f4232d26df4732adf392ed8","slug":"gupkar-declaration-know-about-it-and-article-370-removal-farooq-abdullah-mehbooba-mufti","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए, क्या है गुपकार घोषणा? जिसे हथियार बनाकर अनुच्छेद-370 का राग अलाप रहे हैं घाटी के ये नेता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानिए, क्या है गुपकार घोषणा? जिसे हथियार बनाकर अनुच्छेद-370 का राग अलाप रहे हैं घाटी के ये नेता
Sun, 23 Aug 2020 02:41 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 23 Aug 2020 02:41 PM IST
विज्ञापन
उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला जम्मू, ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, कांग्रेस, पीपुल्स कांफ्रेंस, माकपा, अवामी नेशनल कांफ्रेंस ने हाथ मिलाया है। हालांकि गुपकार हस्ताक्षर घोषणा से प्रदेश कांग्रेस अलग होती दिख रही है। कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए अनुच्छेद 370 और 35-ए की बात न करके लद्दाख को छोड़कर जम्मू-कश्मीर को ही पूर्ण राज्य का दर्जा और स्थानीय निवासियों की भूमि और नौकरियों के लिए संवैधानिक गारंटी की सुरक्षा के लिए अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
विज्ञापन
इन सभी राजनीतिक दलों ने शनिवार को सर्वसम्मति से संकल्प लिया कि वे जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त 2019 से पहले की तरह विशेष दर्जे की बहाली के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम द्वेषपूर्ण, अदूरदर्शी और पूरी तरह असंवैधानिक था। वे पिछले साल के गुपकार घोषणा से बंधे हुए हैं। दलों ने करीब एक वर्ष से अधिक समय के बाद शनिवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे पिछले वर्ष की घोषणा का पालन करेंगे।
विज्ञापन
नेशनल कांफ्रेंस के माध्यम से जारी बयान में कहा गया कि अनुच्छेद 35-ए व 370 की बहाली, जम्मू-कश्मीर के संविधान व राज्य के दर्जे की बहाली के लिए वे संघर्ष करते रहेंगे। राज्य का बंटवारा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। हम दोहराते हैं कि हमारे बिना कुछ नहीं है। पिछले वर्ष चार अगस्त को गुपकार घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले दलों के बीच बहुत कम संवाद हो सका, क्योंकि सरकार ने कई पाबंदियां और दंडात्मक रोक लगा रखी थी। इसका उद्देश्य सभी सामाजिक और राजनीतिक बातचीत व प्रक्रिया को रोकना था। संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर, पीपुल्स कांफ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन, माकपा नेता एमवाई तारिगामी और जम्मू-कश्मीर आवामी नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह शामिल हैं।
विज्ञापन
परीक्षा की घड़ी, पहचान बनाए रखने की भी चुनौती
बयान में कहा गया है कि पांच अगस्त की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की वजह से जम्मू-कश्मीर और नई दिल्ली के बीच रिश्ते बदल गए हैं। पांच अगस्त के बाद उठाए गए कदम असंवैधानिक होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को कमजोर करने वाले हैं। इससे जम्मू-कश्मीर के आम लोगों की पहचान बनाए रखने की चुनौती है। हमें फिर से बताया जा रहा है कि वे क्या हैं। यह परीक्षा की घड़ी है। साथ ही जम्मू-कश्मीर की शांतिप्रिय जनता के लिए पीड़ा का वक्त है। आश्वस्त किया कि उनकी सभी राजनीतिक गतिविधियां राज्य के दर्जे की बहाली के पवित्र लक्ष्य को पूरा करेगी। संकट की इस घड़ी में सभी लोगों से एक जुट रहने की अपील की गई।
यह है गुपकार घोषणा
इन दलों ने कहा कि वे गुपकार घोषणा से बंधे हुए हैं जो चार अगस्त 2019 को नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के गुपकार आवास पर सर्वदलीय बैठक के बाद घोषित की गई थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि दल सर्वसम्मति से घोषणा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की रक्षा के लिए वे एकजुट रहेंगे। इसके एक दिन बाद पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा की थी। गुपकार घोषणा में कहा गया था कि अनुच्छेद 35ए और अनुच्छेद 370 में संशोधन या इन्हें खत्म करना असंवैधानिक होगा। सीमांकन या राज्य का बंटवारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के खिलाफ आक्रामकता होगा।
यह भी पढ़ेंः रवींद्र रैना बोले- अनुच्छेद 370 अब कभी लौट कर नहीं आएगा, सपने देखना बंद करें पार्टियां
गुपकार घोषणा से कांग्रेस का यू-टर्न
कांग्रेस का कहना है कि 5 अगस्त 2019 से बाद परिस्थितियां बदली हैं। जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों की भावनाओं की समीक्षा करके अगली रणनीति तय की जाएगी। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद इसने अपनी पहचान को खोया है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा कि पार्टी ने विशेष दर्जे के मुद्दे पर 4 अगस्त, 2019 को राज्य में अन्य समान विचारधारा वाले दलों के साथ चर्चा की थी। लेकिन केंद्र ने एकतरफा कार्रवाई को अंजाम दिया।
यह भी पढ़ें- Jammu and Kashmir: 2014 की बाढ़ में दो दर्जन जवानों की जान बचाने वाले युवा ने थामा आतंक का दामन
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सत्ता के अलोकतांत्रिक और मनमाने ढंग से जम्मू-कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करते हुए यूटी में तब्दील कर दिया। इसके बाद प्रमुख नेताओं पर पाबंदियां और प्रतिबंध लगाए गए। कांग्रेस पार्टी ने संसद और बाहर दोनों जगहों पर केंद्र सरकार की एकतरफा और मनमानी कार्रवाई का विरोध किया। पार्टी जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों के संवैधानिक अधिकार और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग पर कायम है। इसके अलावा संविधान की अनुसूची छठे के तहत लद्दाख क्षेत्र के लोगों द्वारा उनके अधिकारों की रक्षा करने का भी समर्थन करती है।