गन लाइसेंस केस: आईएएस राजीव रंजन समेत अन्य की 4.69 करोड़ की संपत्ति पर सरकार का कब्जा, प्रशासन करेगा कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने संपत्ति को मंजूरी के लिए न्यायनिर्णायक प्राधिकरण नई दिल्ली के समक्ष रखा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। आरोप है कि यह संपत्ति इन अधिकारियों और गन डीलरों ने अवैध रूप से बनाई है। गन लाइसेंस मामले में जम्मू-कश्मीर के कई सेवारत, सेवानिवृत्त नौकरशाहों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न गन डीलरों व दलालों के खिलाफ जांच शुरू की गई थी।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गन लाइसेंस मामले में अनंतिम रूप से संलग्न संपत्ति पर अब सरकार का हक होगा। आईएएस अधिकारी राजीव रंजन, जेकेएएस अधिकारी इतरत हुसैन और गन लाइसेंस डीलरों की 4.69 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की मंजूरी दी गई है। इस संपत्ति में बैंक खाते, प्लाट, आवास शामिल हैं। जानकारी के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय ने संपत्ति को मंजूरी के लिए न्यायनिर्णायक प्राधिकरण नई दिल्ली के समक्ष रखा था, जिसे मंजूरी मिल गई है।
आरोप है कि यह संपत्ति इन अधिकारियों और गन डीलरों ने अवैध रूप से बनाई है। गन लाइसेंस मामले में जम्मू-कश्मीर के कई सेवारत, सेवानिवृत्त नौकरशाहों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न गन डीलरों व दलालों के खिलाफ जांच शुरू की गई थी।
निदेशालय ने उक्त मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की थी। सीबीआई की चंडीगढ़ स्पेशल क्राइम ब्रांच ने कुपवाड़ा जिले के तत्कालीन उपायुक्तों और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी दी थी।
निदेशालय ने जांच में पाया कि जम्मू-कश्मीर के कई गन डीलरों और दलालों के साथ मिलकर सरकारी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अपने पद का दुरुपयोग किया। नियमों को ताक पर रखकर लाइसेंस जारी करने के मानदंडों, प्रक्रिया और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं।
सरकारी अधिकारी गन डीलरों और दलालों से सीधे उनके बैंक खातों में और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में लाइसेंस जारी करने के लिए पैसे लेते थे। जांच के बाद निदेशालय ने जम्मू कश्मीर के 11 स्थानों पर छापे मारे थे।
कुपवाड़ा जिले के उपायुक्त रहे आईएएस राजीव रंजन, रिटायर जेकेएएस अधिकारी इतरत हुसैन,उपायुक्त कार्यालय कुपवाड़ा के स्टाफ, गन डीलर अमरनाथ भार्गव, मदन मोहन भार्गव, मुकेश भार्गव, मोहिंदर कोतवाल, स्वर्ण सिंह, दशमेष गन डीलर और कश्मीर आर्म्स कारपोरशन पर छापे मारे गए।
इसमें 2.50 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और सोने के गहनों के साथ संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। बड़े स्तर पर फोटोकॉपी और मूल लाइसेंस भी मिले थे। इसी वर्ष अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने न्यायनिर्णायक प्राधिकरण नई दिल्ली के पास इन लोगों की संपत्ति पर सरकारी नियंत्रण की मंजूरी मांगी थी।
अमर उजाला ने पहले ही बताया था
बता दें कि अमर उजाला ने 20 सितंबर को ही खबर प्रकाशित की थी कि गन लाइसेंस मामले में आईएएस राजीव रंजन समेत अन्य की संपत्ति पर सरकारी नियंत्रण संबंधी ईडी की अर्जी को मंजूरी मिल सकती है।
नियमों को ताक पर रख बांटे गन लाइसेंस
गन लाइसेंस के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चंडीगढ़ स्पेशल क्राइम ब्रांच ने कुपवाड़ा जिले के पूर्व उपायुक्तों और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी दी थी। निदेशालय ने जांच में पाया कि जम्मू-कश्मीर के कई गन डीलरों और दलालों के साथ मिलकर सरकारी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अपने पद का दुरुपयोग किया।
नियमों को ताक पर रखकर लाइसेंस जारी करने के मानदंडों, प्रक्रिया और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं। सरकारी अधिकारी गन डीलरों और दलालों से सीधे उनके बैंक खातों में और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में लाइसेंस जारी करने के लिए पैसे लेते थे।
जांच के बाद निदेशालय ने जम्मू कश्मीर के 11 स्थानों पर छापे मारे थे। कुपवाड़ा जिले के उपायुक्त रहे आईएएस राजीव रंजन, रिटायर जेकेएएस अधिकारी इतरत हुसैन,उपायुक्त कार्यालय कुपवाड़ा के स्टाफ, गन डीलर अमरनाथ भार्गव, मदन मोहन भार्गव, मुकेश भार्गव, मोहिंदर कोतवाल, स्वर्ण सिंह, दशमेष गन डीलर और कश्मीर आर्म्स कारपोरशन पर छापे मारे गए।
इसमें 2.50 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और सोने के गहनों के साथ संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। बड़े स्तर पर फोटोकॉपी और मूल लाइसेंस भी मिले थे। इसी वर्ष अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने न्यायनिर्णायक प्राधिकरण नई दिल्ली के पास इन लोगों की संपत्ति पर सरकारी नियंत्रण की मंजूरी मांगी थी।