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Jammu News: फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र मामले में अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी में एमबीबीएस दाखिले में गलत दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिलने के मामले में पुंछ सीएमओ कार्यालय के संबंधित अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। जीएमसी प्रशासन ने स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू को पत्र लिखकर जांच करवाने के लिए कहा है। पत्र में लिखा है कि किस आधार पर दो उम्मीदवारों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए, जबकि मेडिकल बोर्ड में दोनों दिव्यांगता के आधार पर गलत पाए गए।
जीएमसी के वित्त वर्ष 2023-24 में एमबीबीएस के लिए पुंछ के दो उम्मीदवार दिव्यांगता के आधार पर दाखिला लेने पहुंचे थे। एक उम्मीदवार ने स्थायी और अस्थायी दोनों दिव्यांगता प्रमाणपत्र लगाए। अन्य छात्रा ने अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र लगाया, लेकिन जीएमसी के मेडिकल बोर्ड में दोनों दिव्यांगता में अयोग्य मिले। सूत्रों के अनुसार छात्र का स्थायी और अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र इसी साल एक ही दिन में जारी किया गया।
अब सवाल उठता है कि अगर मेडिकल बोर्ड में दोनों का दिव्यांगता आधार रद्द कर दिया गया तो सीएमओ पुंछ कार्यालय से दोनों को स्थायी प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गए। सूत्रों के अनुसार पुंछ से कुछ राजनेताओं ने जीएमसी प्रशासन पर मेडिकल बोर्ड न बनाने के लिए दबाव डाला था, ताकि मामला सामने न आ सके और दोनों उम्मीदवारों को दाखिला मिल जाए। बता दें प्रत्येक जिले में सीएमओ कार्यालय की ओर से ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है और 40 से अधिक प्रतिशत वालों को स्थायी दिव्यांगता का आधार माना जाता है।
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जीएमसी प्रशासन को जवाब भेज दिया है। उसमें बताया कि सीएमओ कार्यालय पुंछ से उक्त छात्र उम्मीदवार को अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया था। जबकि स्थायी प्रमाणपत्र नहीं दिया गया।
- डॉ. राजीव शर्मा, स्वास्थ्य निदेशक, जम्मू
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जम्मू। जीएमसी में एमबीबीएस दाखिले में गलत दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिलने के मामले में पुंछ सीएमओ कार्यालय के संबंधित अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। जीएमसी प्रशासन ने स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू को पत्र लिखकर जांच करवाने के लिए कहा है। पत्र में लिखा है कि किस आधार पर दो उम्मीदवारों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए, जबकि मेडिकल बोर्ड में दोनों दिव्यांगता के आधार पर गलत पाए गए।
जीएमसी के वित्त वर्ष 2023-24 में एमबीबीएस के लिए पुंछ के दो उम्मीदवार दिव्यांगता के आधार पर दाखिला लेने पहुंचे थे। एक उम्मीदवार ने स्थायी और अस्थायी दोनों दिव्यांगता प्रमाणपत्र लगाए। अन्य छात्रा ने अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र लगाया, लेकिन जीएमसी के मेडिकल बोर्ड में दोनों दिव्यांगता में अयोग्य मिले। सूत्रों के अनुसार छात्र का स्थायी और अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र इसी साल एक ही दिन में जारी किया गया।
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अब सवाल उठता है कि अगर मेडिकल बोर्ड में दोनों का दिव्यांगता आधार रद्द कर दिया गया तो सीएमओ पुंछ कार्यालय से दोनों को स्थायी प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गए। सूत्रों के अनुसार पुंछ से कुछ राजनेताओं ने जीएमसी प्रशासन पर मेडिकल बोर्ड न बनाने के लिए दबाव डाला था, ताकि मामला सामने न आ सके और दोनों उम्मीदवारों को दाखिला मिल जाए। बता दें प्रत्येक जिले में सीएमओ कार्यालय की ओर से ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है और 40 से अधिक प्रतिशत वालों को स्थायी दिव्यांगता का आधार माना जाता है।
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जीएमसी प्रशासन को जवाब भेज दिया है। उसमें बताया कि सीएमओ कार्यालय पुंछ से उक्त छात्र उम्मीदवार को अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया था। जबकि स्थायी प्रमाणपत्र नहीं दिया गया।
- डॉ. राजीव शर्मा, स्वास्थ्य निदेशक, जम्मू