Azad Resignation: आजाद जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी बनाएंगे, प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में लेंगे भाग
कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद आजाद ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी लॉंच करने की हड़बड़ी में नहीं है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में इसकी घोषणा शीघ्र होगी। उन्होंने नई पार्टी के गठन के विषय में अन्य जानकारी साझा नहीं की।
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कांग्रेस छोड़कर गुलाम नबी आजाद नई पार्टी का गठन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस नई पार्टी की सबसे पहली इकाई जम्मू-कश्मीर में गठित होगी क्योंकि वहां निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। कहा कि वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी लॉंच करने की हड़बड़ी में नहीं है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में इसकी घोषणा शीघ्र होगी। उन्होंने नई पार्टी के गठन के विषय में अन्य जानकारी साझा नहीं की। कहा कि इस्तीफा काफी लंबे समय तक सोच विचार के बाद दिया है। इसलिए अब पीछे हटने का सवाल नहीं है।
दो साल से पार्टी छोड़ने का इशारा मिल रहा था
आजाद का इस्तीफा देना दुखद होने के साथ एक अजूबा है, लेकिन इसके इशारे पिछले दो साल से मिल रहे थे, क्योंकि अब कांग्रेस के पास आजाद को देने के लिए कुछ नहीं था। हाईकमान ने उनकी वरिष्ठता को तवज्जो दी और आखिर तक इस पर अमल किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में चार नाम दिए और हाईकमान ने मान भी लिया, लेकिन एक नाम आने के बाद आजाद ने इस्तीफा दे दिया था। यह सारे इशारे दिख रहे थे कि आजाद पर बाहरी ताकतों का दबाव था या अपनी कुछ कमजोरियां।
कांग्रेस ने आजाद को जम्मू-कश्मीर के प्रतिनिधित्व पर उनकी अपेक्षा से अधिक चालीस साल तक सब कुछ दिया। आज उनकी तरफ से कुछ वापस देने का मौका था, लेकिन शायद अब भी आखिरी पड़ाव में वह प्रोटोकाल के पीछे दौड़ रहे हैं, जिससे दिख रहा है कि प्रोटोकॉल के लिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। अलबत्ता हाईकमान नेतृत्व ने उनके लिए कोई कमी नहीं छोड़ी। आजाद भाजपा में जाएं या नहीं लेकिन यह सारी गेम उन्हीं के कहने पर दिख रही है। - जीए मीर, पूर्व अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस
आजाद का इस्तीफा दुर्भाग्यपूर्ण
आजाद का इस्तीफा दुर्भाग्यपूर्ण है। हम भाजपा की नीतियों के खिलाफ व्यापक पैमाने पर संघर्ष कर रहे हैं। हमारा 4 सितंबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे देश में महंगाई के खिलाफ बड़ा हल्ला बोल है। इसके साथ 7 सितंबर से भारत जोड़ो यात्रा शुरू हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में आजाद का इस्तीफा देना दुखदायक है। पार्टी अपनी विचारधारा पर चलती रहती है और किसी के लिए नहीं रुकती है। -रजनी पाटिल, एआईसीसी की जम्मू कश्मीर और लद्दाख मामलों की प्रभारी
आजाद अब असल में आजाद हुए हैं
गुलाम नबी आजाद पहले कांग्रेस के गुलाम थे लेकिन अब वह आजाद हैं। आजाद ने कहा कि आंतरिक लोकतंत्र नहीं है और रिमोट कंट्रोल से ही पार्टी चलाई जा रही है। इससे साफ है कि पार्टी को एक ही खानदान चला रहा है। आजाद जैसे नेता ने खून के आंसू रोकर, मजबूर और प्रताड़ित होकर कांग्रेस छोड़ी है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ताओं और मेहनत करने वालों की कद्र नहीं है। सिर्फ एक खानदानी राज रहा है और यह रिमोट कंट्रोल नेहरू गांधी खानदान से चल रहा है। -रवींद्र रैना, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष
पार्टी पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा
गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के एक बड़े नेता थे। कांग्रेस की सोच ने उन्हें 40 वर्ष तक साथ रखा। आजाद के जाने से पार्टी पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। जी23 के बाद भी कांग्रेस ने तरक्की की है। एक धड़े के नेता पिछले आठ वर्षों से पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए। हालांकि आजाद की एक अपनी छवि रही है, जिससे कुछ असर दिखता है। -रमण भल्ला, कार्यकारी अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस समिति