कश्मीर में व्यापार करना अब होगा आसान
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लंबे समय से प्रभावशाली उद्योग नीति की कमी झेल रहे रियासत के उद्यमियों की समस्या जल्द होगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नई उद्योग नीति बनाने के लिए शीर्ष अधिकारियों को न सिर्फ आवश्यक निर्देश दिए, बल्कि नई नीति बनाकर उसकी अधिसूचना भी जल्द जारी करने को कहा।
उमर ने कहा कि नई उद्योग नीति को जल्द अमलीजामा पहनाया जाए ताकि जनवरी 2015 से यह लागू हो सके। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्य के बजट में किए गए प्रावधान के मुताबिक उद्यमियों को वैट रिटर्न के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान जल्द करने और स्थानीय उद्यमियों को उद्योग लगाने में प्रोत्साहन देने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को राज्य औद्योगिक सलाहकार समिति की पांचवीं बैठक में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए चैंबर आफ इंडस्ट्रीज और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।
रियासत को जल्द मिलेगी नई उद्योग नीति
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना था कि उमर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा उद्यमियों को दी जाने वाली रियायतों का मकसद जम्मू कश्मीर में उद्योग को बढ़ावा देना है। इससे युवा उद्यमियों के आत्मनिर्भर बनने के साथ राज्य में रोजगार के नए संसाधन पैदा होंगे।
इस मौके पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वित्त आयुक्त खुर्शीद अहम गनेई ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जो नई उद्योग नीति बनाई गई है उसमें सभी वर्गों का ख्याल रखा गया है।
गनेई ने बताया कि नीति का ड्राफ्ट योजना, वित्त और कानून विभाग को मंजूरी के लिए भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई नीति में उद्योग की दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों को पैकेज का विशेष लाभ मिलेगा। गनेई ने बैठक में राज्य की मौजूदा उद्योग नीति पर भी प्रकाश डाला।
जनवरी 2015 तक हो जाएगी लागू
उन्होंने बताया कि राज्य की नीति के तहत उद्योगों को सस्ती दरों पर बिजली और जमीन मुहैया कराई जा रही है।
बैठक में उद्योग राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू, मुख्य सचिव इकबाल खांडे, आर्थिक सलाहकार जलील अहमद खान, योजना विभाग के प्रमुख सचिव बीआर शर्मा, बीबी व्यास, फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीज के चेयरमैन अनिल सूरी, चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज जम्मू के प्रेसीडेंट राकेश गुप्ता, कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों के अलावा संबंधित विभागों के प्रशासनिक सचिव भी मौजूद थे।
बैठक में ट्रेड नीति, लेबर इंप्लायमेंट, सब्सिडी, ब्रांड प्रमोशन, केंद्र सरकार के पैकेज की मियाद बढ़ाने, वैट रिफंड, ब्रांड प्रमोशन, केंद्र सरकार के पैकेज की मियाद बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई।