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मंजूरी के 10 साल बाद बजट में शामिल हुई गैस पाइपलाइन परियोजना
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट शुरू होनेे पर राज्य में लोगों को घर-घर गैस कनेक्शन मिलेगा। इससे प्रदेश के करीब 27 लाख से अधिक उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। गैस सिलिंडर भरवाने का झंझट खत्म हो जाएगा। जम्मू-श्रीनगर हाईवे के बाधित होने पर भी घाटी में निर्बाध गैस आपूर्ति मिलेगी। इससे पहले भी 725 किलोमीटर की बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर गैस लाइन परियोजना का काम 2011 में शुरू किया गया था, लेकिन कई कारणों से यह परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी।
गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से जुड़ने वाले जिलों को 24 घंटे गैस की आपूर्ति की जा सकेगी। लोगों के घर-घर कनेक्शन होंगे और मीटर लगेगा। इससे हर महीने आवश्यकतानुसार लोग गैस रिफिल करा सकेंगे। चुनिंदा शहरों के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों और अन्य व्यावसायिक प्रयोग के लिए परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। यह महत्वाकांक्षी योजना नए केंद्र शासित प्रदेश के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। हालांकि, बजट में योजना कितने साल में पूरी होगी इसका जिक्र नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि परियोजना के एलाइनमेंट से लेकर सर्वे और भूमि अधिग्रहण में काफी वक्त लग सकता है। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे ठप होने से मालवाहक वाहनों की सप्लाई प्रभावित होती है। ऐसी परिस्थितियों में कश्मीर घाटी के लिए यह गैस पाइपलाइन परियोजना ईंधन आपूर्ति के लिहाज से लाइफलाइन जैसी है।
जम्मू में टर्मिनल भी था प्रस्तावित
725 किलोमीटर लंबी बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर गैस पाइपलाइन परियोजना से खासकर शहरी क्षेत्र में चौबीसों घंटे गैस की आपूर्ति की जानी थी। इसके लिए जम्मू में टर्मिनल प्रस्तावित था। गैस पाइपलाइन को कठुआ-सांबा-जम्मू-उधमपुर-रामबन-अनंतनाग से श्रीनगर तक पहुंचाया जाना था। प्रवेश जिला कठुआ के 51 गांवों की भूमि चिह्नित की गई थी, जिसके अधिग्रहण की फाइल मंडलायुक्त कार्यालय भेजी गई। इस तरह से अन्य जिलों में भी प्रारंभिक कसरत हुई, लेकिन किन्हीं कारणों से परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से जुड़ने वाले जिलों को 24 घंटे गैस की आपूर्ति की जा सकेगी। लोगों के घर-घर कनेक्शन होंगे और मीटर लगेगा। इससे हर महीने आवश्यकतानुसार लोग गैस रिफिल करा सकेंगे। चुनिंदा शहरों के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों और अन्य व्यावसायिक प्रयोग के लिए परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। यह महत्वाकांक्षी योजना नए केंद्र शासित प्रदेश के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। हालांकि, बजट में योजना कितने साल में पूरी होगी इसका जिक्र नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि परियोजना के एलाइनमेंट से लेकर सर्वे और भूमि अधिग्रहण में काफी वक्त लग सकता है। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे ठप होने से मालवाहक वाहनों की सप्लाई प्रभावित होती है। ऐसी परिस्थितियों में कश्मीर घाटी के लिए यह गैस पाइपलाइन परियोजना ईंधन आपूर्ति के लिहाज से लाइफलाइन जैसी है।
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जम्मू में टर्मिनल भी था प्रस्तावित
725 किलोमीटर लंबी बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर गैस पाइपलाइन परियोजना से खासकर शहरी क्षेत्र में चौबीसों घंटे गैस की आपूर्ति की जानी थी। इसके लिए जम्मू में टर्मिनल प्रस्तावित था। गैस पाइपलाइन को कठुआ-सांबा-जम्मू-उधमपुर-रामबन-अनंतनाग से श्रीनगर तक पहुंचाया जाना था। प्रवेश जिला कठुआ के 51 गांवों की भूमि चिह्नित की गई थी, जिसके अधिग्रहण की फाइल मंडलायुक्त कार्यालय भेजी गई। इस तरह से अन्य जिलों में भी प्रारंभिक कसरत हुई, लेकिन किन्हीं कारणों से परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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