बयान पर होती बहसों से बीच पैसों के अभाव में एक और गांधीयन सेंटर हुआ बंद
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जम्मू विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति महात्मा गांधी के विचारों को बढ़ावा देने के नाम पर शुरू किया गया गांधीयन सेंटर फॉर पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज (जीसीपीसीएस) बंद हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से ग्रांट न मिलना इसकी वजह बताया जा रहा है।
यह सेंटर जम्मू विश्वविद्यालय में 13 साल से चल रहा था। इसकी स्थापना एक अप्रैल, 2004 को हुई थी। सेंटर की एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन खुद विश्वविद्यालय के कुलपति थे। हर साल 25 से 30 कार्यक्रम आयोजित कराए जा रहे थे।
महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी समेत रमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता डा. किरण बेदी, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (जीएसडीएस) नई दिल्ली की निदेशक डा. सविता सिंह, मालवीय सेंटर फार पीस रिसर्च (एमसीपीआर) के प्रो. प्रियांकर उपाध्याय, यूनिवर्सिटी आफ ब्रैडफोर्ड, यूके के यूनुस समद जैसे कई लोगों ने अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
'गांधी के विचारों को पूछने वाला कोई नहीं रहा'
इसकी स्थापना का मकसद भी यही थी कि गांधी के अहिंसा, शांति-सद्भाव से जुड़े विचारों को प्रसारित किया जाए। विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय कर छात्र-छात्राओं को गांधी के विचारों के प्रति जागरूक किया जाए। लेकिन कुछ साल चलाने के बाद, जबकि सेंटर को विभाग बनाए जाने की मुहिम जोर पकड़ रही थी, इस सेंटर को बंद कर दिया गया।
गांधी के विचारों को पूछने वाला कोई नहीं रहा। सेंटर को बंद करने के पीछे यही कहा जा सकता है। इस 31 मार्च को सेंटर यूजीसी की ग्रांट न आने की वजह से बंद हो गया है। -अनुराग गंगल, निदेशक, गांधीयन सेंटर फॉर पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज