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ऐसे थे हालात जब उस पत्थरबाज को जीप पर बांधा, पढ़ें मेजर गोगोई का पूरा बयान

Wed, 24 May 2017 04:00 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/श्रीनगर Updated Wed, 24 May 2017 04:00 PM IST
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full statement of Major Gogoi Indian Army
पत्थरबाज को जीप से बांधने पर था विवाद - फोटो : File Photo

घाटी में पत्थरबाजों से निपटने के लिए आर्मी की जीप से बांधकर एक स्थानीय कश्मीरी युवक को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने वाले मेजर लीतुल गोगोई ने घटना पर चुप्पी तोड़ दी है। गोगोई ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए यह कदम उठाया था। बेहद हिंसक हो चुकी भीड़ पर वह फायरिंग का आदेश करवाते तो कम से कम 12 लोगों की जान जाती। गौर हो कि गोगोई को हाल ही में सेना प्रमुख ने जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद निरोधी कार्रवाई के लिए सम्मानित किया है। हालांकि सेना ने साफ  किया है कि उनके इस सम्मान से जीप वाली घटना का कोई संबंध नहीं है।

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गोगाई ने बताया कि 9 अप्रैल को जब बडगाम में लोकसभा उपचुनाव था। उन्हें सुबह सवा नौ बजे खबर मिली कि गुंडीपुरा के पास कुछ पोलिंग अफसर और सुरक्षा कर्मी पोलिंग स्टेशन के अंदर फंसे हैं क्योंकि बाहर भीड़ पथराव कर रही है। इसके बाद, वह क्विक रिएक्शन टीम के साथ मौके पर रास्ते की अड़चनें दूर करते हुए 30 मिनट में मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि पोलिंग टीम और सुरक्षा कर्मी सुरक्षित हैं।
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 इसी दौरान उन्हें डेढ़ किमी दूरी पर स्थित उतलीग्राम से एक और हालात बेकाबू होने की कॉल मिली। इसके बाद वह वहां पहुंचे तो देखा लोग पथराव कर रहे थे। पथराव करने वालों में महिलाएं और बच्चे भी थे, जो छतों पर चढ़कर पत्थर फेंक रहे थे। मेजर ने बताया कि वह अपनी गाड़ियाें से निकलने में असमर्थ थे। उनकी बात सुनने को कोई तैयार नहीं था।

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ऐसे हाथ आया पत्थरबाज फारूक डार

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पत्थरबाज को जीप से बांधने पर था विवाद - फोटो : File Photo
मेजर ने बताया कि उन्हें पत्थरबाजों की भीड़ में एक शख्स दिखा, जो पथराव करने के साथ भीड़ को उकसा रहा था। उन्होंने अपनी क्विक रिस्पांस टीम से उस शख्स को पकड़ने के लिए कहा। उस शख्स ने बाइक से भागने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ। पकड़ा जाने वाला शख्स फारूक अहमद डार था, जिसे बाद में जीप से बांधा गया था।

गोगोई ने कहा कि इस शख्स को लेकर वह पोलिंग बूथ की ओर बढ़ने लगे। बूथ में कई सुरक्षा कर्मी फंसे थे। हालांकि, भीड़ और ज्यादा हिंसक हो गई और पथराव तेज हो गया। इसके अलावा, वहां घोषणा होने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। तभी भीड़ ने उन पर पेट्रोल बम भी फेंका, लेकिन गनीमत रही कि बम फटा नहीं।
 

मौके पर थी 1200 लोगों की भीड़

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Major Gogoi - फोटो : ANI

गोगोई के मुताबिक, लाउड स्पीकर पर एलान करने के बावजूद जब भीड़ ने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्हें उस स्थानीय शख्स को जीप पर बांधने का ख्याल आया। ऐसा करते ही पत्थरबाजी रुक गई और उन्हें सभी पोलिंग अफसरों और सुरक्षाकर्मियों को वहां से निकलने का मौका मिला। गोगोई ने कहा कि उनका यह कदम सिर्फ स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए था। मौके पर 1200 से ज्यादा लोगों की भीड़ थी, जो उनकी बात नहीं सुन रही थी। अगर वह फायरिंग का आदेश देते तो कम से कम 12 लोग मारे जाते। 


 
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