बाढ़ से घाटी के उद्योगों को एक लाख करोड़ का घाटा
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घाटी के लाल चौक सहित अन्य मुख्य बाजारों में होलसेल कारोबार पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। कम से कम 35 हजार करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान है। इसमें 25 हजार करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर और दस हजार करोड़ का स्टाक नष्ट हुआ है।
हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट उद्योग पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माना जाने वाला पर्यटन उद्योग इस कदर बर्बाद हुआ है कि उसे संभलने में वर्षों लग जाएंगे।
तीस साल पीछे चला गया कश्मीर
कश्मीर घाटी में आई बाढ़ से उद्योग व व्यापार जगत को एक लाख करोड़ रुपये (17 बिलियन डालर) का नुकसान होने का अनुमान है। इस संबंध में व्यापारिक संगठनों की ओर से तैयार की गई पहली अनुमानित नुकसान रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान हालात से उबरने में कम से कम 30 साल लगेंगे।
जम्मू-कश्मीर के लिए बनी प्रधानमंत्री टास्क फोर्स के रियासत से एकमात्र सदस्य शकील कलंदर का कहना है कि उन्होंने रिपोर्ट रियासती सरकार को सौंप दी है। अब रियासती सरकार उस आधार पर केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजेगी।
उनका कहना है कि घाटी के उद्योगों के अलावा होलसेल व रिटेल कारोबार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। इसमें हाउसिंग सेक्टर, प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर, ट्रांसपोर्ट और पर्यटन उद्योग को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है।
अब डराने लगी है पीएम की खामोशी
कलंदर के अनुसार उद्योग और व्यापार जगत को वापस पटरी में आने के लिए कम से कम 30 साल लगेंगे। यानी कश्मीर 30 साल पीछे चला गया है। केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की उम्मीद लगाए बैठे उद्यमी और व्यापारी केंद्र की चुप्पी से पसोपेश में हैं।
कलंदर कहते हैं कि आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दौरा किया और आश्वासन दिया कि हरसंभव मदद की जाएगी।
केंद्र सरकार ने पहले चरण में बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद भेजी, लेकिन उद्योग और व्यापार जगत के लिए उनकी खामोशी चिंता का सबब है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी मायूस नहीं करेंगे।