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अस्पताल में शोपीस बना फायर हायड्रेंट सिस्टम
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 07 Jul 2015 10:07 PM IST
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पिछले सात माह में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दूसरी बड़ी आग की घटना के बाद जांच में कई हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए हैं। एम्स की तर्ज पर 120 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इस अस्पताल में आग से बचाव के लिए फायर हायड्रेंट सिस्टम तो लगाया गया है, मगर वह सालों से चालू ही नहीं किया गया है। ताजा घटना में सीटी स्कैन यूनिट में धुआं फैलने और आग लगने के बावजूद किसी भी अलार्म सेंसर ने काम नहीं किया।
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सितंबर 2013 में सुपर स्पेशलिटी को शुरू किया गया था, लेकिन निर्माणाधीन एजेंसी सीएपीडी ने अभी तक अस्पताल प्रशासन को कई सर्विस हैंडओवर ही नहीं की हैं। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि हैंडओवर न होने से उक्त सर्विस चालू ही नहीं की जा सकी। एसोसिएटेड अस्पतालों की प्रशासक बबिला रकवाल के अनुसार सीएपीडी की ओर से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रशासन को फायर हायड्रेंट सिस्टम, सीसीटीवी कैमरा, टेलीफोन एक्सचेंज, सीएसएसडी, वाटर पंप, डीजे सेट, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन, एसी प्लांट लिफ्ट, गैस पाइप लाइन हैंडओवर ही नहीं की गई है।
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इसके लिए सीएपीडी को कई बार लिखित में अवगत कराया गया है। फायर हायड्रेंट सिस्टम चालू न होने से गत दिवस भी सीटी स्कैन यूनिट में यूपीएस सिस्टम को आग से बचाया नहीं जा सका। इस घटना में यूपीएस सिस्टम की 108 बैटरियां नष्ट हो गईं। दो एसी जल गए। इससे पहले 9 नवंबर 2014 को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का यूपीएस बैंक धमाके के साथ स्वाह हो गया था। तब 117 बैटरियां जलकर राख हो गई थीं।
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करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। अस्पताल के विंग ए और बी के आधे हिस्से में कई दिन तक बिजली गुल रहने से कई यूनिट बंद किए गए थे। उल्लेखनीय है कि सुपर स्पेशलिटी के प्रोजेक्ट को सीपीडब्ल्यूडी (सेंटर पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) विभाग ने 17 फरवरी 2008 को शुरू किया था। लेकिन 18 माह में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट को 2013 में करीब 64 महीनों के बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सका। इसके कई बार उद्घाटन भी हुए।
दहशत में रहे मरीज
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सीटी स्कैन में गत दिवस हुई आग की घटना के बाद मंगलवार को भी मरीज दहशत में रहे। दूसरे दिन भी सीटी स्कैन यूनिट से आग लगने की दुर्गंध आ रही थी। यूनिट में जगह जगह आग निशान हैं। अस्पताल में नेफरोलाजी विभाग में अपने मरीज के साथ आए तीमारदार रोशनदीन ने कहा कि गत दिवस अस्पताल में बड़ी आग की घटना होते बची।
एम्स की तर्ज पर बनाए गए ऐसे अस्पताल में आग से बचाव के लिए सभी जरूरी प्रबंध होने चाहिए। अस्पताल के भीतर कई वार्ड चल रहे हैं। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। एक अन्य तीमारदार राहुल बख्शी ने कहा कि अगर निर्माणाधीन एजेंसी ने कई सेवाएं अस्पताल प्रशासन को हैंडओवर ही नहीं कीं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। बिना सुरक्षा कवच के अस्पताल को शुरू करवाना मरीजों के लिए खतरे से खाली नहीं है।
सुपर स्पेशलिटी का सीटी स्कैन ठप
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आग की घटना के बाद सीटी स्कैन यूनिट में काम ठप हो गया है। यूनिट में 108 बैटरियां जलने से बैकअप सिस्टम पूरी तरह से खत्म हो गया है। सीटी स्कैन मशीन के नुकसान का अभी पता नहीं चल पाया है। बुधवार को इंजीनियरों की जांच के बाद इसका आकलन किया जाएगा।
मंगलवार को सीटी स्कैन के सभी मरीजों को जीएमसी भेजा गया। सुपर स्पेशलिटी में रोजाना करीब पंद्रह सीटी स्कैन हो रहे थे। लेकिन यूनिट ठप होने से मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इसमें गंभीर मरीजों को सीटी स्कैन के लिए अब निजी या दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ेगा। अलबत्ता आग की घटना के बाद अन्य सभी वार्डों में चिकित्सा व्यवस्थाओं को सुचारु बना दिया गया है।
आग की घटना में एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही अस्पताल प्रशासन को कई सेवाएं हैंडओवर न करने पर सीएपीडी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है। इसकी जांच की जा रही है। बैटरियों को बदलने के लिए संबंधित कंपनी को लिखा गया है।
डाक्टर रोमेश गुप्ता, अस्पताल अधीक्षक
स्वास्थ्य मंत्री ने जायजा लिया
स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल सिंह ने मंगलवार को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का दौरा कर सीटी स्कैन यूनिट में आग से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने सीएपीडी की ओर से अस्पताल प्रशासन को कई सेवाएं हैंडओवर न करने पर असंतोष जताते हुए निर्माणाधीन एजेंसी को शीघ्र सीटी स्कैन के यूपीएस सिस्टम में नई बैटरी लगाने के निर्देश दिए। बार बार अस्पताल में आग लगने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बचाव के सभी प्रबंध किए जाएं। उन्होंने जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता को निर्देश दिए कि मरीजों की सहूलियत के लिए सभी चिकित्सा इंतजाम किए जाएं।