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सत्यपाल मलिक को अब्दुल्ला की चेतावनी: कश्मीर आकर बयानबाजी करें, उचित जवाब दिया जाएगा

Fri, 22 Oct 2021 12:01 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 22 Oct 2021 12:01 AM IST
सार

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैंने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की बिजली के लिए बिना किसी से परामर्श किए यह समझौता कर दिया था। इसमें हमें सावला कोट और बगलिहार प्रोजेक्ट मिले।

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Farooq Abdullah warning to Satyapal Malik Come to Kashmir proper answer will be given
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के रोशनी एक्ट पर दी टिप्पणी पर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के प्रमुख एवं सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें चुनौती दी कि वह जम्मू-कश्मीर में आकर ऐसी बयानबाजी करें तो उन्हें उचित जवाब दिया जाएगा। वह अपने ही बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। प्रदेश के पास नौ पावर प्रोजेक्ट थे, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि आप दो और हमें सात दे दें, हमारा पैसा पूरा होने पर प्रोजेक्ट आपको दे देंगे। कहा- मैंने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की बिजली के लिए बिना किसी से परामर्श किए यह समझौता कर दिया था। इसमें हमें सावला कोट और बगलिहार प्रोजेक्ट मिले।

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फारूक अब्दुल्ला का पाकिस्तान प्रेम
फारूक अब्दुल्ला का एक बार फिर पाकिस्तान प्रेम उमड़ आया। कहा कि पाकिस्तान से बातचीत और दोस्ती करके ही जम्मू-कश्मीर में शांति कायम हो सकती है। वे अपने जम्मू दौरे के दौरान शुक्रवार को शेर-ए-कश्मीर भवन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मोदी सरकार पर प्रहार करते कहा कि भाजपा और आरएसएस चुनाव जीतने के लिए नफरत फैलाने का काम करते रहे हैं। यूपी के चुनाव जीतने के लिए भी इसी हथकंडे को अपनाकर इस नफरत को जम्मू से फैलाया जा रहा है।   
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भविष्य में कोई जंग होती है तो दोनों तरफ से गंभीर परिणाम होंगे

कहा कि भाजपा के कार्यकाल में टिटवाल में पाकिस्तान सरहद पर उन्हें पानी का मुआवजा दिया जाता था। दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। हमने तीन लड़ाइयां लड़ी हैं, लेकिन भविष्य में कोई जंग होती है तो दोनों तरफ से गंभीर परिणाम होंगे और आम लोग ही मरेंगे। अगर आज दोनों देश साथ होते तो सियालकोट और यहां से लोग एक-दूसरे के पास जाते। दोस्ती में रहेंगे तो टैंकों और अन्य रसद पर जो पैसा खर्च किया जा रहा है उसे किसानों की गरीबी दूर करने के लिए दिया जा सकता है। 

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महंगाई और केंद्रीय मंत्रियों के कश्मीर दौरों पर भी सरकार को घेरा

नेकां प्रमुख ने पूछा कि प्रधानमंत्री बताएं सिलेंडर गैस, पेट्रोल, दालों की कीमतें कहां है। कश्मीर में केंद्रीय मंत्रियों के दौरे गुलमर्ग और सोनमर्ग तक ही सीमित रहे। सरकार मीडिया की आवाज दबा रही है। प्रशासनिक तंत्र में आम लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है। पंचायती नुमाइंदों को अधिकार नहीं दिए गए हैं। देश में भुखमरी बढ़ी है। इंदिरा गांधी के समय ग्रीन क्रांति लाई गई थी। भाजपा और आरएसएस वाले जितना भी कर लें भाईचारे को खत्म नहीं कर सकते। जम्मू के हर गांव  में आरएसएस का आदमी है, लेकिन कश्मीर में ऐसा नहीं है, वे वहां भी जाएं। 
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