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'आतंकवाद है तो जहन्नुम में जाए पाकिस्तान से दोस्ती'

Mon, 29 Feb 2016 05:34 AM IST
Updated Mon, 29 Feb 2016 05:34 AM IST
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Farooq Abdullah on relations with Pakistan

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेकां के प्रधान डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि क्रिकेट से रिश्तों को सुधारा नहीं जा सकता है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को पहले आतंकवाद को रोकना होगा।

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अगर वह ऐसा नहीं करता है तो जहन्नुम में जाए ऐसी दोस्ती। आतंकवाद के साथ बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने फूड सेफ्टी एक्ट को रियासत के खिलाफ बताया। इससे तीस लाख लोगों को राशन से महरूम होना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि जेएनयू घटनाक्रम को अगर कुलपति नोटिस में लेते और पुलिस नहीं बुलाते तो भारत में उबली आग को रोका जा सकता था। अफजल गुरु पर अगर किसी को चर्चा करनी है तो उसे अपने स्तर पर खामोशी से किया जाए।
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वीसी रोक सकते थे जेएनयू घटनाक्रम

Farooq Abdullah on relations with Pakistan
कुछ मुद्दों पर आरएसएस और भाजपा को सीधे दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कांग्रेस को भी धर्मनिरपेक्ष स्तर पर अपने को मजबूत बनाना होगा। आम बजट में टैक्स ढांचे को आसान बनाया जाए, तभी आम आदमी को लाभ मिल सकता है।

हरियाणा जाट आंदोलन में गैंगरेप पर न्यायपालिका ने सख्त कदम उठाया है। इससे अवाम में विश्वास बढ़ा है। रियासत में सबसे बड़े जनाधार वाले पीडीपी-भाजपा दल अवाम के बीच में आने का दम नहीं रखते हैं।

विधानसभा को भंग करके आम लोगों के बीच आना चाहिए। संसद में शोरशराबा देश की छवि को नुकसान पहुंचता है। यहां आम लोगों की सुनवाई होनी चाहिए। रियासत में आतंकवाद से पर्यटन को नुकसान पहुंचा है। 
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