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अमर उजाला संवाद: पार्ट टाइम नहीं है खेती, कृषि निदेशक बोले- किसान को फुल टाइम कारोबारी बनना होगा
Thu, 16 Feb 2023 01:08 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Thu, 16 Feb 2023 01:08 AM IST
सार
जम्मू के कृषि निदेशक केके शर्मा ने बताया कि नई पीढ़ी को खेती से जोड़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कृषि के सामने आ रही चुनौतियों, उनके समाधान और खेतीबाड़ी को आने वाले भविष्य का सफल बिजनेस मॉडल बनाने की कार्ययोजना साझा की।
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संवाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोविड काल की आपात स्थितियों में आर्थिक गतिविधियां चौपट हो गईं थीं। उस दौर में भी खेती ने ही अर्थव्यवस्था संभाली। यह खेती की ताकत थी, लेकिन नई चुनौतियों के बाद किसान को बदलना होगा। खेती को टाइम पास गतिविधि के तौर पर देखा जाता है, जबकि किसान के फुलटाइम कारोबारी बनने से ही बात बनेगी।
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नई पीढ़ी को खेती से जोड़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। यह कहना है जम्मू के कृषि निदेशक केके शर्मा का। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में कृषि निदेशक केके शर्मा ने कृषि के सामने आ रही चुनौतियों, उनके समाधान और खेतीबाड़ी को आने वाले भविष्य का सफल बिजनेस मॉडल बनाने की कार्ययोजना साझा की।
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जम्मू-कश्मीर में कृषि क्षेत्र को कहां देखते हैं ?
जम्मू संभाग के 6.20 लाख समेत प्रदेश में 13 लाख से ज्यादा किसान परिवार हैं। मोटे तौर पर देखें तो हमारा कृषि उत्पादन अपने लिए है। जम्मू-कश्मीर कृषि क्षेत्र में कंज्यूमर प्रदेश है, लेकिन आने वाली चुनौतियों और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हमारी योजना एक ऐसा मॉडल विकसित करने की है, जहां किसान का प्रभाव बीज से बाजार तक हो। प्रदेश सरकार ने 29 प्रस्तावों के लिए 5012 करोड़ की परियोजना मंजूर की है। इससे कृषि क्षेत्र आने वाले वर्षाें में सफल उद्यम के रूप में स्थापित होगा।
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किसान उत्पादन में आगे है, लेकिन उसे फसल का उचित दाम नहीं मिलता। इस पर क्या कहेंगे ?
किसान के नफे का बड़ा हिस्सा बिचौलियों के पास जाता रहा है। हमने केंद्र के पोर्टल पर 23 सीजनल मंडियों को ऑनलाइन किया है। यहां किसान खुद को रजिस्टर कर सीधे माल बेचते हैं। पंजीकरण और माल बेचने के दौरान हमें पता चल जाता है कि कौन बिचौलिया है और आम किसान को किस स्तर पर नुकसान हो रहा है।
ऑनलाइन मंडियों की मदद से किसानों ने इस साल 3.5 लाख क्विंटल धान बेचा है, जिसका 72 घंटों में भुगतान भी कर दिया गया। हमारी योजना एकीकृत मंडियां खोलने की है, जिसमें कृषि व संबद्ध गतिविधियों से जुड़े किसान साल भर अपने उत्पाद बेच और खरीद सकेंगे।
फायदा कम है, प्रति परिवार जमीन कम हो रही है। नई पीढ़ी खेती क्यों अपनाए ?
मैं दोहराना चाहूंगा कि खेती अब टाइमपास नहीं है। इसे उद्यम और फुलटाइम कारोबार की तरह लेना होगा। हमारे पास कृषि आधारित 100 सफल उद्यमी हैं। इनमें 25 इंजीनियर और एमबीए डिग्री हासिल युवा भी हैं, जो न सिर्फ कृषि व संबद्ध गतिविधियों के एकीकृत मॉडल पर काम कर अच्छी आय हासिल कर रहे हैं बल्कि सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
कृषि क्षेत्र हीन भावना से नहीं बल्कि सम्मान के साथ किया जाने वाला पेशा बनाना होगा। एकीकृत कृषि कार्यक्रम के तहत 1.25 लाख कृषि उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
भविष्य की फसलें तैयार करने पर जोर
मिलेट मिशन (मोटा अनाज) का जिक्र करते हुए कृषि निदेशक ने कहा, अभी हम फॉल्टी फूड खा रहे हैं। गेहूं, चावल जैसे अनाज में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और फाइबर कम है। इससे बीमारियां हो रही हैं। मोटे अनाज में स्वास्थ्य अनुकूल फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है और कार्बोहाइड्रेट कम। इसके सेवन से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इसी तरह ज्यादा पोषक तत्वों वाली फोर्टिफाइड फसलें तैयार की जा रही हैं। किसानों में भी इन फसलों को लेकर रुझान बनने लगा है।