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हर जुबां पर खेतों से बिछुड़ने का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Sat, 18 Jul 2015 01:21 AM IST
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पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलाबारी के चलते किसानों ने करीब एक दशक से सैकड़ों एकड़ भूमि पर खेती करना ही बंद कर दिया है। किसानों ने तारबंदी के आगे की अपनी जमीनों को लगभग भुला दिया है। सीमांत ग्रामीणों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। वे जब पाकिस्तान की तरफ किसानों को तारबंदी तक खेती करते देखते हैं, उनके उनके सीने में अपनी सरकार के प्रति रोष बढ़ने लगता है।
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हीरानगर सेक्टर के दो दर्जन से अधिक गांव सीमा से सटे हैं। इस इलाके के अधिकतर लोग किसान हैं और इसी से उनके घर का खर्च चलता है। सीमा से सटे गांव के निवासी हेमराज, सुदेश कुमार, बलवीर चंद, सुजान सिंह, सुखविंद्र सिंह, नरेश कुमार आदि ने कहा कि सीमा प्रहरियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर किसान आज भी बार्डर से पीछे नहीं हटे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है।
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किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। अपने ही घरों में वे कैद होकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए और इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए। ग्रामीणों ने बताया कि आज भी उन्हें पाकिस्तान की गोलाबारी रुकने और उनके मिजाज को देखकर फसल लगानी पड़ती है, जबकि सीमा पार दूसरी ओर के किसान बेखौफ तारबंदी तक खेती करते हैं।
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