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Assembly Elections : जम्मू कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में परिवार ही आधार, कुनबे को आगे बढ़ा रहीं पीडीपी-नेकां
Thu, 22 Aug 2024 01:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 22 Aug 2024 01:47 AM IST
सार
अभी तक के परिदृश्य में क्षेत्रीय पार्टियां परिवारवाद को बढ़ाती नजर आ रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) शामिल हैं।
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जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में नए राजनीतिक माहौल में परिवारवाद को दरकिनार करने की बात हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से गैर राजनीतिक परिवारों से एक लाख नए चेहरे राजनीति में लाने की बात कह चुके हैं। प्रधानमंत्री के भाषण के एक हफ्ते बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव का एलान हो चुका है। अभी तक के परिदृश्य में क्षेत्रीय पार्टियां परिवारवाद को बढ़ाती नजर आ रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) शामिल हैं।
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आगामी विधानसभा चुनाव में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बेटी को आगे बढ़ाते हुए खुद चुनाव लड़ने से किनारा कर लिया है। उमर अब्दुल्ला ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है लेकिन समर्थक उनको फैसले पर पुरर्विचार करने को कह रहे हैं। नेकां में वह उपाध्यक्ष और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला अध्यक्ष हैं। उमर के दोनों बेटे लोकसभा चुनाव में उनके लिए प्रचार कर चुके हैं। कयास हैं कि उनको भी राजनीति में उतरने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इत्तेहाद पार्टी के इंजीनियर रशीद बारामुला से उमर अब्दुल्ला को हराकर चर्चा में आए थे। अब उनके बेटों और भाई के विधानसभा चुनाव में उतरने की चर्चा है। अगर ऐसा होता है तो इस चुनाव में एक और परिवार दूसरी पीढ़ी को कमान सौंपेगा। इसके अलावा पैंथर्स पार्टी के संस्थापक रहे भीम सिंह के भतीजे और परिवार के अन्य लोग भी राजनीति में कुनबा बढ़ा रहे हैं।
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उमर और महबूबा को हराकर परिवारवाद को 2024 के लोकसभा चुनाव में लोगों ने जरूर झटका दिया। कश्मीर केंद्रित सीटों पर इन दोनों दलों के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवारवाद को जनता ने नकार दिया था। इसमें बारामुला संसदीय सीट से नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और अनंतनाग-बारामुला सीट से पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को हार का सामना करना पड़ा था।
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नेकां की बात करें तो शेख अब्दुल्ला और चौधरी गुलाम अब्बास ने 1932 में जम्मू-कश्मीर में ऑल जम्मू कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के रूप में पार्टी की स्थापना की। 1939 में इसका नाम बदलकर नेशनल कॉन्फ्रेंस कर दिया गया। 1947 से लेकर अगले कई दशक तक किसी न किसी रूप में नेकां जम्मू-कश्मीर में सत्ता में रही। सितंबर 1982 में शेख अब्दुल्ला के देहांत के बाद उनके बेटे डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी की कमान संभाली। इससे पहले शेख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर राज्य के प्रधान मंत्री रहे। 2002 में डॉ. फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला ने भी पार्टी की कमान संभाली, लेकिन 2009 में फारूक ने फिर से पार्टी का नेतृत्व संभाल लिया।
अब्दुल्ला परिवार में तीसरी पीढ़ी सक्रिय, चौथी को प्रशिक्षण
फारूक ने 1982-2002 और 2009 के बाद पार्टी अध्यक्ष के रूप में काम किया। वह 1982-84, 1986-90 और 1996-2002 में मुख्यमंत्री रहे। 2017 में उन्हें लोकसभा में श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। फारूक पहली बार राजनीति में तब शामिल हुए जब उन्होंने 1977 में अपने पिता को राज्य विधानसभा में फिर से निर्वाचित कराने में मदद की। वहीं, नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला जनवरी 2009 से जनवरी 2015 तक जम्मू-कश्मीर के युवा मुख्यमंत्री बने। इससे पहले जुलाई 2001 से दिसंबर 2002 तक केंद्र में विदेश राज्य मंत्री रहे। वह मार्च 1998 से मई 2009 तक सांसद रहे। अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी सक्रिय है और चौथी को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुफ्ती परिवार की तीसरी पीढ़ी संभालेगी बागडोर
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1999 में पीडीपी की स्थापना की। जनवरी 2016 में उनके निधन के बाद महबूबा मुफ्ती ने पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान संभाली। इससे पहले मुफ्ती मोहम्मद सईद मार्च 2015 से जनवरी 2016 तक जम्मू-कश्मीर के 6वें मुख्यमंत्री रहे। दिसंबर 1989 से नवंबर 1990 तक गृह मंत्री, मई 1986 से जुलाई 1987 तक पर्यटन मंत्री, 1998–1999 में सांसद रहे। वहीं, महबूबा मुफ्ती अप्रैल 2016 से जून 2018 तक मुख्यमंत्री रहीं। इससे पहले मई 2004 से 16 मई 2009 और 2014 से 2016 तक सांसद रहीं। मुफ्ती परिवार में इल्तिजा के रूप में तीसरी पीढ़ी राजनीति में उतर रही है।
जम्मू-कश्मीर की जनता के हितों से दोनों दलों ने किया खिलवाड़-चुग
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व जम्मू-कश्मीर मामलों के प्रभारी तरुण चुग ने कहा कि नेकां और पीडीपी ने हमेशा परिवारवाद को बढ़ावा देकर जम्मू-कश्मीर के लोगों से विश्वासघात किया है। ये दोनों दल अपने स्वार्थ के लिए जनता के हितों से खिलवाड़ करते रहे हैं। अब नए जम्मू कश्मीर में लोगों ने दोनों दलों के परिवारवाद को नकार दिया है। लोग जम्मू-कश्मीर में बदलाव चाहते हैं और भाजपा ने इस दिशा में उनको साथ लेकर काम किया है।