बीजेपी-पीडीपी सरकार में ये बनेंगे मंत्री, पढ़ें खबर
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जम्मू-कश्मीर में जल्द ही सरकार गठन का ऐलान हो सकता है। सरकार गठन का खाका आज कल में तय हो सकता है। इसके लिए आज पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मुलाकात होनी है। वहीं बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की मुलाकात प्रस्तावित है।
सरकार गठन के इस अंतिम दौर में मंत्रियों के नामों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नई कैबिनेट में किस-किस को जगह मिलेगी। हम आपको बताने जा रहे हैं कि नई सरकार में पीडीपी और भाजपा के किन चेहरों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
पीडीपी के तीन अहम चेहरे
नईम अख्तर
जब मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री थे तब नईम अख्तर(63) सरकार में नौकरशाह थे। वह सईद के निजी सचिव थे, माना जाता है कि वह सईद का दांया हाथ हैं। 2008 में जब नेकां सत्ता में आई तो नईम अख्तर ने स्वैच्छित सेवानिवृत्ति ले ली, उन्हें पीडीपी का प्रमुख प्रवक्ता बनाया गया। पीडीपी में अहम ओहदा रखने वाले अख्तर पार्टी के थिंक टैंक हैं और सरकार गठन के बार कैबिनेट में उनकी अहम भूमिका तय मानी जा रही है, अगर कैबिनेट में उन्हें नहीं लिया जाता है तो उन्हें सरकार में प्रवक्ता के पद दिया जा सकता है।
इमरान अंसारी
पहली बार विधायक बने इमरान अंसारी(42) धर्मगुरू और पूर्व मंत्री इफ्तिकार हुसैन अंसारी के बेटे हैं। इमरान ने राजनीतिक विज्ञान में पीजी किया है, इसके साथ ही उन्होंने सीरिया से धार्मिक शिक्षा भी ग्रहण की है। वह पीडीपी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्य हैं, ऑल जेएंडके शिया एसोसिएश्न के अध्यक्ष हैं। इमरान काफी टैक सेवी हैं, उनका कैबिनेट में जाना तय माना जा रहा है।
अब्दुल रहमान बट
अब्दुल रहमान बट(58) मुफ्ती परिवार के बेहद खास हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है कि मुफ्ती ने अपनी परंपरागत सीट बिजबेहरा रहमान को दे दी, जहां से यह परिवार बीते 24 सालों से जीत रहा है। इससे पहले वह सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं। नई सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो मिलना तय है या उन्हें स्पीकर भी बनाया जा सकता है।
पहली बार बने विधायक अब बनेंगे मंत्री
हसीब दबरू
साझा सरकार में हसीब दबरू(53) एक अहम नाम होंगे। पहली बार विधायक बने अर्थशास्त्री हसीब इससे पहले बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के संपादक रह चुके हैं, योजना आयोग के लिए काम कर चुके हैं, जेएंड के बैंक के चेयरमैन रह चुके हैं और पूर्व की मुफ्ती सरकार में वह आर्थिक सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। पीडीपी का घोषणा पत्र भी इन्होंने ही तैयार किया है। पीडीपी-बीजेपी गठबंधन में मुख्य वार्ताकार रहे हैं।
अल्ताफ बुखारी
पहली बार विधायक बने अल्ताफ बुखारी(59) सरकार में अहम रोल अदा करने के लिए तैयार है। बुखारी श्रीनगर के बड़े व्यापारी हैं और एफआईएल इंडस्ट्रीज स्थापित करने का श्रेय उन्हें जाता है। श्रीनगर के बागवानी उत्पादों को बाजार मुहैया करने में उन्होंने बड़ी डील की है जिससे अवाम को बहुत लाभ मिला है। वह राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के निदेशक रह चुके हैं और 2005 में पीडीपी में शामिल हुए थे। बुखारी को पार्टी में खजानची बनाया गया था, वह पार्टी के वित्त संबंधी काम देखते हैं। वह पार्टी की पीसीए और घोषणा पत्र समिति के कामकाज को भी देखते हैं। मंत्रीमंडल में उन्हें श्रीनगर के प्रतिनिधि के तौर पर जगह मिलना तय है।
अब्दुल हक खान
अब्दुल हक खान(61) गरीबों में बेहद लोकप्रिय नेता हैं। पेशे से वकील अब्दुल गरीबों को मुफ्त कानूनी सलाह देते हैं। 1983 में उन्होंने पीपुल्स कांफ्रेंस ज्वाइन की थी इसके बाद 2003 में पीडीपी में आने के बाद उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। लोआब में चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्ती ने जनता से वादा किया था कि अब्दुल के जीतने पर उन्हें कैबिनेट में जगह दी जाएगी। वह पहाड़ी जनजाति के प्रतिनिधि के रूप में कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं, इससे पार्टी कुपवाड़ा में अपना जनाधार बचाने में कामयाब रहेगी।
उमर को हराने वाले मीर भी कैबिनेट में
बशारत बुखारी
बशारत बुखारी(52) एक ऐसा नाम है जो ग्रामीण आबादी के बीच बेहद लोकप्रिय है। रोडियो कश्मीर पर आने वाले कार्यक्रम शरबीन के पीछे भी बुखारी का ही दिमाग था। उन्होंने 2003 में पीडीपी ज्वाइन करने के बाद वह विधान परिषद के लिए चुने गए। उन्हें पार्टी का यूथ प्रेजीडेंट और बारामूला जिले का जिला अध्यक्ष बनाया गया। वह संग्राम सीट से तीन बार जीत चुके हैं। पार्टी के कुशल वक्ता के रूप में कैबिनेट में वह बारामूला का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
मोहम्मद अशरफ मीर
बिजनेसमैन रह चुके मोहम्मद अशरफ मीर(45) ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को उनकी सोनावर सीट से हराया है। बिल्डर परिवार से आने वाले मीर ने बिजनेस स्टडीज में ग्रेजुएशन की है। 2003 में पीडीपी में शामिल होने के बाद उन्हें श्रीनगर का जिला अध्यक्ष बनाया गया था। मीर का कैबिनेट में आना लगभग तय माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो कैबिनेट में श्रीनगर से आने वाले वह पहले व्यक्ति होंगे।
अशिया नक़श
अशिया नक़श(44) पार्टी की इकलौती महिला उम्मीदवार थीं और उन्होंने जीत दर्ज की है। समाजिक कार्यकर्ता के रूप में करियर शुरू करने वाली अशिया कश्मीर यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट हैं और 2002 में पीडीपी में शामिल हुईं थी। वह पीडीपी सांसद सातिक हमीद कारा की रिश्तेदार भी हैं।
चौधरी जुल्फीकार अली
जब पीडीपी कश्मीर केंद्रित पार्टी थी तब चौधरी जुल्फीकार अली(44) पहले ऐसे नेता थे जो घाटी के बाहर से थे। राजौरी से दूसरी बार विधायक बने चौधरी बिजनेस ग्रेजुएट और लॉ में एमए कर चुके हैं। अगर पार्टी कैबिनेट में जम्मू संभाग के प्रतिनिधि को जगह देती है तो चौधरी को पद मिलना तय है।
ये हैं भाजपा के तीन दिग्गज नेता
निर्मल सिंह
भाजपा के दिग्गज नेता निर्मल सिंह(55) आपातकाल के दौर जेल जा चुके हैं। वह जम्मू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर रह चुके हैं। वर्तमान में वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य हैं। पहले वह जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। 1980 के दशक में वह आरएसएस के लिए लुधियाना में काम कर चुके हैं। उनके पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह पहली बार विधायक बने हैं और उनका डिप्टी सीएम बनना तय माना जा रहा है।
कविंदर गुप्ता
कविंदर गुप्ता(55) भी आपातकाल के दौर में जेल जा चुके हैं। आरएसएस और एबीवीपी में उनकी अपनी अहम जगह है। पंजाब में एबीवीपी सचिव रहे गुप्ता 1982 में जम्मू आ गए थे। 1984 में पाकिस्तानी गोलीबारी का विरोध करते हुए उन्होंने हजारों ग्रामीणों का नेतृत्व किया था। वह राज्य में भाजयूमों के अध्यक्ष रह चुके हैं। तीन बार जम्मू के मेयर रह चुके गुप्ता पहली बार विधायक बने हैं।
बाली भगत
रामबन से 1996 में विधायक बने बाली भगत(48) भाजपा के राज्य महासचिव हैं। भाजपा के निर्वाचित 25 विधायकों में वह इस वक्त सबसे वरिष्ठ हैं। भगत ने 1990 के दशक में आतंकवाद से लड़ने के लिए लोगों को जुटाने में सक्रिय रूप से काम किया है। वह एबीवीपी के राज्य सचिव भी रह चुके हैं।
हिंदू-मुस्लिम इलाकों से जीतने वाले
अब्दुल गनी कोहली
रिटायर्ड टेक्नोक्रेट अब्दुल गनी कोहली(67) भाजपा के अकेले मुस्लिम विधायक हैं। वह पहली बार चुनाव जीते हैं। अहम है कि वह हिंदू बहुत क्षेत्र कालाकोटे से जीते हैं। वह दिग्गज गुर्जर नेता मियां बशीर के दामाद हैं। वह चुनाव से कुछ महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हार चुके हैं।
सुनील शर्मा
सुनील शर्मा(39) भाजपा के राज्य सचिव रह चुके हैं। अहम है आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले शर्मा ने मुस्लिम बहुल किश्तवाड़ से पहली बार चुनाव जीता है। उन्होंने सुरक्षा बलों के साथ काउंटर इंसर्जेंसी पर काम किया है। 2013 में किश्तवाड़ में सांप्रदायिक दंगे के दौरान उनका नाम भी सामने आया था। शर्मा के पास किसी तरह का प्रशासनिक अनुभव नहीं है।
सोफी यूसुफ
विधान परिषद सदस्य सोफी यूसुफ(49) घाटी से भाजपा की पहले निर्वाचित नेता हैं और एक कश्मीरी मुसलमान के रूप में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। इससे पहले वह पुलिस विभाग में कार्यरत थे। वह 1999 में एक आतंकवादी हमले में घायल हो गईं थे।
श्याम के साथ सज्जाद भी कैबिनेट में
श्याम चौधरी
श्याम चौधरी(54) सूचेतगढ़ सीट से दूसरी बार विधायक बने हैं। इलाके में उनका अच्छा जनाधार है लेकिन उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है।
सज्जाद लोन
हंदवाड़ा से पीपुल्स कांफ्रेंस के विधायक अलगाववादी नेता सज्जाद लोन(49), अब्दुल गनी लोन के पुत्र हैं। वह लंदन में पढ़े लिखे हैं, अपने पिता की हत्या के बाद 2002 में राजनीति में शामिल होने से पहले दिल्ली और दुबई में व्यापार चलाते थे। चुनावों से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के बाद भाजपा के साथ गठबंधन की घोषणा की थी। संभावना है कि भाजपा कोटे से उन्हें एक प्रमुख कैबिनेट पोर्टफोलियो मिल जाए।