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Jammu News: 12 बार चेताने के बाद भी नहीं दिया जवाब वित्त आयुक्त का वेतन रोकने का आदेश
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जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने जलशक्ति विभाग के वित्त आयुक्त का वेतन रोकने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया कि वित्त आयुक्त को जवाब देने के 12 मौके दिए गए, इसके बावजूद विभाग ने अदालत के समक्ष जवाब दाखिल नहीं किया।
इसे अवहेलना मानते हुए यह कार्रवाई की गई है। कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा व प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी ने यह आदेश सुनाया है। मामला जलशक्ति विभाग के कुछ कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़ा है जिसे लेकर उन्होंने बीते साल याचिका दाखिल की थी। 23 अप्रैल 2025 को न्यायाधिकरण ने आखिरी मौका देते हुए चेतावनी दी थी कि अगर अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। जब मामला दो जून 2025 को फिर से सुना गया तब भी कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद न्यायाधिकरण ने फिर से चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं हुआ तो जल शक्ति विभाग के वित्त सचिव को खुद हाजिर होना होगा और उनका वेतन भी रोका जाएगा।
लगातार आदेश की अनदेखी पर न्यायाधिकरण ने माना कि अधिकारी जानबूझकर अदालत के आदेश को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसे में जलशक्ति विभाग जम्मू-श्रीनगर के वित्त आयुक्त का वेतन तुरंत प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया गया है। खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि गरीब याचिकाकर्ता जो प्रशासन से न्याय नहीं पा सकते, अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं लेकिन अफसरों के लापरवाह रवैये से लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है। जब इतने बड़े पद पर बैठा अधिकारी ही आदेश की पालना नहीं करता, तो आम आदमी से नियम मानने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
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इसे अवहेलना मानते हुए यह कार्रवाई की गई है। कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा व प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी ने यह आदेश सुनाया है। मामला जलशक्ति विभाग के कुछ कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़ा है जिसे लेकर उन्होंने बीते साल याचिका दाखिल की थी। 23 अप्रैल 2025 को न्यायाधिकरण ने आखिरी मौका देते हुए चेतावनी दी थी कि अगर अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। जब मामला दो जून 2025 को फिर से सुना गया तब भी कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद न्यायाधिकरण ने फिर से चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं हुआ तो जल शक्ति विभाग के वित्त सचिव को खुद हाजिर होना होगा और उनका वेतन भी रोका जाएगा।
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लगातार आदेश की अनदेखी पर न्यायाधिकरण ने माना कि अधिकारी जानबूझकर अदालत के आदेश को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसे में जलशक्ति विभाग जम्मू-श्रीनगर के वित्त आयुक्त का वेतन तुरंत प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया गया है। खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि गरीब याचिकाकर्ता जो प्रशासन से न्याय नहीं पा सकते, अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं लेकिन अफसरों के लापरवाह रवैये से लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है। जब इतने बड़े पद पर बैठा अधिकारी ही आदेश की पालना नहीं करता, तो आम आदमी से नियम मानने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
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