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Jammu News: आजीविका से पहले वोट को प्राथमिकता, पहलगाम में घोड़े वालों ने पर्यटकों को घुमाने से पहले किया मतदान
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-सप्ताह अंत में पर्यटकों की रही भीड़, मतदान के चलते घोड़े वालों का करना पड़ा इंतजार
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में घोड़ेवालों ने शनिवार को अपनी दिहाड़ी शुरू करने से पहले मतदान किया। पर्यटकों को इंतजार करने के लिए कहकर घोड़े वाले वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे।
सप्ताह अंत होने के चलते एक तरफ पहलगाम पर्यटकों से भरा हुआ था, तो दूसरी तरफ घोड़े वाले लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्रों पर कतार में खड़े थे। अधिकांश समय आजीविका की तलाश में व्यस्त रहने वाले इन लोगों ने वोट देने के लिए घंटों इंतजार किया। कोई पैदल तो कोई घोड़े पर सवार होकर मतदान केंद्र पहुंचा। बशीर अहमद ने बताया मैं अपने घोड़ों को छोड़कर वोट डालने आया हूं। एक अन्य घोड़े वाले अली मोहम्मद चोपान ने बताया कि कुछ पर्यटक सुबह उनके साथ घूमने जाना चाहते थे, लेकिन उनको रुकने के लिए कहकर पहले वोट देने पहुंचा हूं। पर्यटक तो कल भी आ जाएंगे मगर चुनाव पांच साल बाद आएंगे। शकील अहमद ने कहा, कश्मीर के लोगों को कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है जो कई वर्षों से लंबित हैं और हम ऐसा प्रतिनिधि चाहते हैं जो वास्तव में हमारा प्रतिनिधित्व कर सके।
घोड़े पर पहुंचे मतदान करने
इस बीच सोशल मीडिया पर घोड़े पर सवार एक बुजुर्ग का वीडियो सामने आया, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। बावजूद इसके कुलगाम जिले के एक मतदान केंद्र पर घोड़े पर सवार होकर वोट डालने पहुंचे। उन्होंने कहा, सेहत ठीक नहीं है लेकिन वोट देने के लिए आया हूं। मैंने अपना वोट बर्बाद नहीं किया।
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में घोड़ेवालों ने शनिवार को अपनी दिहाड़ी शुरू करने से पहले मतदान किया। पर्यटकों को इंतजार करने के लिए कहकर घोड़े वाले वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे।
सप्ताह अंत होने के चलते एक तरफ पहलगाम पर्यटकों से भरा हुआ था, तो दूसरी तरफ घोड़े वाले लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्रों पर कतार में खड़े थे। अधिकांश समय आजीविका की तलाश में व्यस्त रहने वाले इन लोगों ने वोट देने के लिए घंटों इंतजार किया। कोई पैदल तो कोई घोड़े पर सवार होकर मतदान केंद्र पहुंचा। बशीर अहमद ने बताया मैं अपने घोड़ों को छोड़कर वोट डालने आया हूं। एक अन्य घोड़े वाले अली मोहम्मद चोपान ने बताया कि कुछ पर्यटक सुबह उनके साथ घूमने जाना चाहते थे, लेकिन उनको रुकने के लिए कहकर पहले वोट देने पहुंचा हूं। पर्यटक तो कल भी आ जाएंगे मगर चुनाव पांच साल बाद आएंगे। शकील अहमद ने कहा, कश्मीर के लोगों को कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है जो कई वर्षों से लंबित हैं और हम ऐसा प्रतिनिधि चाहते हैं जो वास्तव में हमारा प्रतिनिधित्व कर सके।
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घोड़े पर पहुंचे मतदान करने
इस बीच सोशल मीडिया पर घोड़े पर सवार एक बुजुर्ग का वीडियो सामने आया, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। बावजूद इसके कुलगाम जिले के एक मतदान केंद्र पर घोड़े पर सवार होकर वोट डालने पहुंचे। उन्होंने कहा, सेहत ठीक नहीं है लेकिन वोट देने के लिए आया हूं। मैंने अपना वोट बर्बाद नहीं किया।
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