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धोलिया मिडिल स्कूल में 428 बच्चों के लिए मात्र आठ कमरे, नौ शिक्षक

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स्कूल के बरामदे में बैठकर पढ़ते बच्चे।
बाड़ी ब्राह्मणा। धौलिया मिडिल स्कूल में शिक्षा सुविधाएं भगवान भरोसे हैं। 428 बच्चों के लिए मात्र नौ शिक्षक तैनात हैं। पहली कक्षा में 88 बच्चे हैं, जिन्हें मात्र एक ही शिक्षक के हवाले किया गया है। 88 बच्चों की पढ़ाई 40 बच्चों की क्षमता वाले कमरे में होती है। वहीं, जिस दिन कोई शिक्षक अवकाश पर होता है, तो कुक को पढ़ाने के लिए लगाया जाता है। इससे केंद्र सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को सशक्त बनाने का सपना महज सपना ही साबित हो रहा है।
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सरकारी मिडिल स्कूल धोलिया जिला सांबा में बच्चों की संख्या के हिसाब से पहले नंबर पर आता है। इसके बावजूद स्कूल में सुविधाओं का टोटा है, जिस कारण न तो बच्चे सही से पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही उन्हें उचित माहौल मिल रहा है। इस स्कूल में ही प्राइमरी स्कूल मोड़ा धोलिया को भी क्लब किया गया है, जिसमें बच्चों की संख्या 128 और तीन शिक्षक नियुक्त हैं। मिडिल स्कूल धोलिया में बच्चों की संख्या 300 है और 6 शिक्षक तैनात हैं, जिनमें से मात्र दो ही स्थायी हैं। यह दोनों स्कूल एक ही इमारत में चल रहे हैं। पहली कक्षा में 88 विद्यार्थी हैं और एक शिक्षक उनको पढ़ाता है, जो बिल्कुल गलत है। जिस दिन कोई शिक्षक छुट्टी पर होता है तो स्कूल में कुछ की सेवाएं दे रही नॉन टीचिंग स्टाफ को पढ़ाने के लिए लगाया जाता है।
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स्कूल की हालत सही नहीं, कुछ कमरों में दरारें, दो कमरों की टपकती है छत
428 बच्चों के लिए आठ कमरे हैं हर कमरे में कक्षा लगती है। लेकिन कमरों की क्षमता 35 से 40 बच्चों की है, जिस कारण कई बार कक्षाएं बरामदे में लेने पढ़ती हैं। बारिश के समय दो कमरों की छत टपकती है और कुछ कमरों की दीवारों पर दरारें पड़ी हुई हैं।
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कई बच्चे फर्श पर बैठने के लिए मजबूर
पहली, चौथी, छठी और सातवीं कक्षा के बच्चों के लिए डेस्क नहीं हैं। उन्हें आज भी मैट पर बिठाकर पढ़ाया जाता है। मैट भी स्कूल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं, जिस कारण कई बच्चे फर्श पर बैठने के लिए मजबूर हैं।
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40 बच्चों की क्षमता वाले कमरे में पढ़ाए जा रहे 88 बच्चे
स्कूल में शिक्षकों और ढांचे की कमी से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या के हिसाब से स्कूल में 15 टीचर होने चाहिए, लेकिन नौ से ही काम चलाया जा रहा है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पहली कक्षा में 88 बच्चे हैं, जिनके लिए दो सेक्शन बनाना जरूरी है, लेकिन एक ही कक्षा में सभी को पढ़ाया जा रहा है। कमरे की क्षमता 40 बच्चों की है।
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उपायुक्त के निर्देश पर आजतक नहीं हुई कार्रवाई
वार्ड 10 के पार्षद प्रवीण कुमार ने शिक्षकों की कमी और ढांचे के संबंध में डीसी अनुराधा गुप्ता को अर्जी भेजी थी। उन्होंने संज्ञान लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी यशवंत सिंह को भेजा था। उसके बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी ने लिखित में पुरमंडल ब्लॉक के जेडईओ राजेंद्र कुमार को स्कूल का दौरा कर दो दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा था, लेकिन एक हफ्ते बाद भी कुछ नहीं हुआ है। हालांकि, जोनल एजूकेशन प्लानिंग अफसर रशीद आलम ने स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था और जल्द कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति जस के तस है।

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शिक्षा विभाग को बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं है। बच्चों के अभिभावक रोजाना गुहार लगा रहे हैं। लेकिन आला अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बावजूद भी मामला अधर में लटका हुआ है।
- प्रवीण कुमार, पार्षद, वार्ड-10
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