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सरकारी मिडिल स्कूल का नाम नायक सूबेदार लाल सिंह
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सांबा। आजादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में जिला प्रशासन ने सोमवार को सरकारी मिडिल स्कूल चक सलारियां रामगढ़ का नाम शहीद सूबेदार लाल सिंह के नाम पर रखा। जो बांग्लादेश में 1971 के युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेना के जवानों, सीआरपीएफ और देश के लिए कर्तव्य निभाते हुए प्राणों की आहुति देने वाले पुलिस कर्मियों के नाम पर चिह्नित सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सड़कों और इमारतों सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का नाम रखने का फैसला किया है। इसी कड़ी में सरकारी मिडिल स्कूल चक सलारियां को सूबेदार लाल सिंह मेमोरियल शासकीय मध्य विद्यालय चक सलारियां, रामगढ़ नामित किया गया है। स्कूल का उद्घाटन वीर नारी मोहिंदर कौर और उनके 03 बेटों ने किया।
सूबेदार लाल सिंह का जन्म रामगढ़ के ग्राम चक सलारिया में कर्म कौर के परिवार में हुआ। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव मलूकन वाला और गांव जाखन (बादाला) में प्राप्त की, जो अब पाकिस्तान में है। 14 साल 6 माह की उम्र में वह पंजाब रेजिमेंट में शामिल हो गए। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में सेवा की और विभिन्न कार्यों में भाग लिया। सूबेदार लाल सिंह एक दिसंबर 1971 को बांग्लादेश युद्ध के दौरान एक ऑपरेशन कैक्टस लिली ईस्टर्न थिएटर में शहीद हुए। अतिरिक्त उपायुक्त सुरम चंद शर्मा ने इस अवसर पर बोलते हुए देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए हमारे योद्धाओं के बलिदान को स्वीकार करने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव के तहत सरकार की पहल पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम के दौरान डीडीसी सदस्य सरबजीत सिंह जोहल, बीडीसी अध्यक्ष रामगढ़ दर्शन सिंह, एडीसी तिलक राज शास्त्री, एसडीएम विनय शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेना के जवानों, सीआरपीएफ और देश के लिए कर्तव्य निभाते हुए प्राणों की आहुति देने वाले पुलिस कर्मियों के नाम पर चिह्नित सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सड़कों और इमारतों सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का नाम रखने का फैसला किया है। इसी कड़ी में सरकारी मिडिल स्कूल चक सलारियां को सूबेदार लाल सिंह मेमोरियल शासकीय मध्य विद्यालय चक सलारियां, रामगढ़ नामित किया गया है। स्कूल का उद्घाटन वीर नारी मोहिंदर कौर और उनके 03 बेटों ने किया।
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सूबेदार लाल सिंह का जन्म रामगढ़ के ग्राम चक सलारिया में कर्म कौर के परिवार में हुआ। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव मलूकन वाला और गांव जाखन (बादाला) में प्राप्त की, जो अब पाकिस्तान में है। 14 साल 6 माह की उम्र में वह पंजाब रेजिमेंट में शामिल हो गए। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में सेवा की और विभिन्न कार्यों में भाग लिया। सूबेदार लाल सिंह एक दिसंबर 1971 को बांग्लादेश युद्ध के दौरान एक ऑपरेशन कैक्टस लिली ईस्टर्न थिएटर में शहीद हुए। अतिरिक्त उपायुक्त सुरम चंद शर्मा ने इस अवसर पर बोलते हुए देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए हमारे योद्धाओं के बलिदान को स्वीकार करने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव के तहत सरकार की पहल पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम के दौरान डीडीसी सदस्य सरबजीत सिंह जोहल, बीडीसी अध्यक्ष रामगढ़ दर्शन सिंह, एडीसी तिलक राज शास्त्री, एसडीएम विनय शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।