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Jammu News: एआई से बाढ़ और वेस्ट मैनेजमेंट की चुनौतियों का होगा निपटारा
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जेयू के छात्रों का प्रोजेक्ट समाज और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान में उम्मीद बनकर उभरा
संवाद न्यूज़ एजेंसी
जम्मू। जम्मू यूनिवर्सिटी के डीवाईडी डिजाइनर डिग्री के छात्रों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रोजेक्ट्स अब समाज और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान में उम्मीद बनकर उभर रहे हैं। प्रोजेक्ट को लेकर छात्रा तविशी आमला के अनुसार उनके समूह की ओर से विकसित एआई मॉडल दूपहर एआई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। यह मॉडल संबंधित इलाकों की तस्वीरें, भौगोलिक स्थिति और मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर बताएगा कि तेज बारिश में किन क्षेत्रों में जलभराव हो सकता है। बाढ़ की स्थिति कहां गंभीर बन सकती है। यह बाढ़ के संभावित कारणों और उससे बचाव के उपाय भी सुझाएगा। इस प्रोजेक्ट में समूह दिल्ली सरकार के साथ भी कार्य करने जा रहा है। टैरा एआई नामक दूसरा प्रोजेक्ट किसानों के लिए तैयार किया जा रहा है। यह एआई मॉडल फसल कटाई के बाद मिट्टी में बची कार्बन की मात्रा का डेटा मैपिंग के जरिए विश्लेषण करेगा और किसानों को भूमि की गुणवत्ता तथा कार्बन स्तर की जानकारी उपलब्ध कराएगा जिससे खेती को अधिक लाभकारी और वैज्ञानिक बनाया जा सकेगा।
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फूलों के वेस्ट से धूप, अगरबत्ती तैयार होंगे
छात्रा परिधि महाजन ने एआई आधारित वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। यह मॉडल विशेष रूप से मंदिरों से निकलने वाले फूल, कपड़े और खाने-पीने के वेस्ट का विश्लेषण कर बताएगा कि उन्हें किस प्रकार रिसाइकिल कर उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। फूलों के वेस्ट से धूप, अगरबत्ती और हवन कप जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। खाद्य वेस्ट से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया और उसकी गुणवत्ता संबंधी जानकारी भी यह मॉडल उपलब्ध कराएगा।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
जम्मू। जम्मू यूनिवर्सिटी के डीवाईडी डिजाइनर डिग्री के छात्रों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रोजेक्ट्स अब समाज और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान में उम्मीद बनकर उभर रहे हैं। प्रोजेक्ट को लेकर छात्रा तविशी आमला के अनुसार उनके समूह की ओर से विकसित एआई मॉडल दूपहर एआई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। यह मॉडल संबंधित इलाकों की तस्वीरें, भौगोलिक स्थिति और मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर बताएगा कि तेज बारिश में किन क्षेत्रों में जलभराव हो सकता है। बाढ़ की स्थिति कहां गंभीर बन सकती है। यह बाढ़ के संभावित कारणों और उससे बचाव के उपाय भी सुझाएगा। इस प्रोजेक्ट में समूह दिल्ली सरकार के साथ भी कार्य करने जा रहा है। टैरा एआई नामक दूसरा प्रोजेक्ट किसानों के लिए तैयार किया जा रहा है। यह एआई मॉडल फसल कटाई के बाद मिट्टी में बची कार्बन की मात्रा का डेटा मैपिंग के जरिए विश्लेषण करेगा और किसानों को भूमि की गुणवत्ता तथा कार्बन स्तर की जानकारी उपलब्ध कराएगा जिससे खेती को अधिक लाभकारी और वैज्ञानिक बनाया जा सकेगा।
फूलों के वेस्ट से धूप, अगरबत्ती तैयार होंगे
छात्रा परिधि महाजन ने एआई आधारित वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। यह मॉडल विशेष रूप से मंदिरों से निकलने वाले फूल, कपड़े और खाने-पीने के वेस्ट का विश्लेषण कर बताएगा कि उन्हें किस प्रकार रिसाइकिल कर उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। फूलों के वेस्ट से धूप, अगरबत्ती और हवन कप जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। खाद्य वेस्ट से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया और उसकी गुणवत्ता संबंधी जानकारी भी यह मॉडल उपलब्ध कराएगा।
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