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किश्तवाड़ में आसमानी आफत: धमाका हुआ और हर तरफ मच गया कोहराम, 15 साल के बच्चे ने सुनाया हादसे का आंखोंदेखा मंजर

Fri, 15 Aug 2025 06:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजेश चंदर, किश्तवाड़
राजेश चंदर, किश्तवाड़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 15 Aug 2025 06:01 AM IST
सार

अनिल जम्मू आईडीपीएस में नवीं के छात्र हैं। वे अपने माता-पिता और बहन के साथ मचैल माता का दर्शन करने गए थे। उनका परिवार दर्शन के बाद जैसे ही नीचे लौटा यह हादसा हो गया।

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disaster in Kishtwar: a 15-year-old child narrated the eyewitness account of the accident
किश्तवाड़ में बादल फटने से भारी तबाही - फोटो : PTI/ANI

विस्तार

किश्तवाड़ के चिशोती गांव में तबाही के मंजर के प्रत्यक्ष गवाह 15 वर्षीय अनिल मेहरा ने आंखों देखा जो हाल बताया, वह रूह कंपा देने वाला है। अनिल जम्मू आईडीपीएस में नवीं के छात्र हैं। वे अपने माता-पिता और बहन के साथ मचैल माता का दर्शन करने गए थे। उनका परिवार दर्शन के बाद जैसे ही नीचे लौटा यह हादसा हो गया।

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अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में अनिल बताते हैं, हम लोग दर्शन करके बहुत खुश थे। मैं अपने परिवार से काफी आगे चल रहा था। पापा बोधराज मेहरा चिशोती गांव की पार्किंग से कार निकालने लगे। मां और बहन भी उनसे कुछ ही पीछे आ रहे थे।
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इसी बीच बहुत तेज धमाका हुआ। लगा जैसे पहाड़ का ही कोई हिस्सा टूट गया हो। हम लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही भारी पत्थरों को बहाता पानी का रेला आ गया। पार्किंग की कई गाड़ियां देखते-देखते मलबे में दब गईं। मेरी बहन गाड़ी के नीचे आ गई। मां पर भारी मलबा आ गिरा और वह उसके नीचे दब गईं। पापा और वहां मौजूद कुछ लोगों की मदद से मां शालू मेहरा को निकाला गया। बहन को भी कई लोगों ने मिलकर निकाला। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मां की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जम्मू के अस्पताल में रेफर कर दिया गया है।
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बकौल अनिल, यह सारी घटना पलक झपकते हो गई। जिस जगह पर उत्सव जैसा माहौल था,वह जगह मलबे के पहाड़ में तब्दील हो गई। हर तरफ चीख-पुकार और बचाओ -बचाओ की आवाज सुनाई पड़ रही थी। मेरे पापा भी लोगों को बचाने में लगे थे। बमुश्किल दो-तीन मिनट में वहां का सारा नजारा ही बदल गया। मैं समझ नहीं पा रहा था कि आखिर यह क्या और कैसे हो गया। लोग कह रहे थे बादल फट गया है। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बादल फट सकता है। मलबे में दब कर कई लोग दम तोड़ चुके थे। भगवान का शुक्र है कि मम्मा और दीदी बच गई हैं। अनिल बताते हैं, हम लोग अगर दर्शन करके नीचे न लौट आए होते तो हममें से शायद कोई नहीं बच पाता। ऐसा भयावह दृश्य हमने कभी नहीं देखा था।

तापमान में वृद्धि से बढ़ रहीं बादल फटने की घटनाएं 
पोलर साइंस पत्रिका में प्रकाशित नवीनतम शोध के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण हिमालयी क्षेत्र में नमी और संवहन यानी कन्वेक्शन (ऊष्मा से ऊपरी वायुमंडल में उठने वाली हवा) की प्रक्रिया तेज हो गई है। गर्म हवाएं जब समुद्र से भारी मात्रा में नमी लेकर हिमालय की तलहटी तक पहुंचती हैं, तो पहाड़ इन हवाओं को ऊपर की ओर ले जाते हैं। इस प्रक्रिया को ओरोग्राफिक लिफ्ट कहा जाता है। इससे विशाल क्यूम्यलोनिम्बस नामक बादल बनते हैं, जो बारिश की बड़ी बूंदों को धारण कर सकते हैं। इससे नमी से भरी हुई हवा का प्रवाह ऊपर उठता है और बादल बड़ा होता जाता है। बारिश की कोई संभावना न होने के कारण, यह इतना भारी हो जाता है कि एक बिंदु पर यह फटने लगता है। ऊपर उठते समय जब यह नमी ठंडी हवाओं से मिलती है, तो तीव्र संघनन (कंडंजेशन) होता है और भारी वर्षा के रूप में गिरता है। 


जलवायु परिवर्तन की भूमिका
हिमालय में तापमान वृद्धि की दर वैश्विक औसत से अधिक है। इससे वाष्पीकरण बढ़ता है, वातावरण में नमी अधिक होती है व इससे भारी वर्षा की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से भी वायुमंडलीय नमी में वृद्धि होती है, जो स्थानीय स्तर पर अचानक बाढ़ की घटनाओं में योगदान देती है। पोलर साइंस के अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को अस्थिर कर रहा है, जिससे अल्ट्रा लोकलाइज्ड (अत्यधिक सीमित दायरे में होने वाली) वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिन पर पूर्व चेतावनी देना अत्यंत कठिन है।

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