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37 साल बाद भी इंसाफ की आस: जम्मू में भूख हड़ताल पर बैठे पनुन कश्मीर के कार्यकर्ता, अलग मातृभूमि की मांग

Sat, 05 Sep 2026 05:06 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sat, 05 Sep 2026 05:06 PM IST
सार

पनुन कश्मीर ने जम्मू में भूख हड़ताल कर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की आधिकारिक मान्यता, नरसंहार कानून और अलग मातृभूमि की मांग उठाई।

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Panun Kashmir stages hunger strike, presses for genocide law and separate homeland in valley
पनुन कश्मीर का जम्मू में भूख हड़ताल - फोटो : एजेंसी

विस्तार

विस्थापित कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन पनुन कश्मीर ने शनिवार को जम्मू में एक दिवसीय भूख हड़ताल की। संगठन ने कश्मीरी पंडित समुदाय के नरसंहार को आधिकारिक रूप से मान्यता देने, इसके लिए विशेष कानून बनाने और घाटी में अलग मातृभूमि की स्थापना समेत कई मांगें उठाईं।

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प्रेस क्लब के पास किया प्रदर्शन
यह भूख हड़ताल जम्मू के प्रेस क्लब के पास आयोजित की गई। संगठन के मुताबिक, यह अभियान 20 जुलाई को दिल्ली में किए गए प्रदर्शन की अगली कड़ी है। पनुन कश्मीर का कहना है कि वह 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन से जुड़े मामलों में न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है।

37 साल से आधिकारिक मान्यता की मांग
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टीटो गंजू ने कहा कि समुदाय पिछले 37 वर्षों से नरसंहार को औपचारिक मान्यता देने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में इस विषय का उल्लेख होने के बावजूद सरकार की ओर से इसे लेकर अभी तक औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है।

उन्होंने भारत के जेनोसाइड कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता होने का हवाला देते हुए एक विशेष नरसंहार कानून बनाने की मांग भी की। संगठन ने 2020 में इस संबंध में एक विधेयक का प्रस्ताव देने की बात कही और मामले की जांच तथा कानून पर विचार के लिए आयोग गठित करने की मांग की।

तीन प्रमुख मांगों पर जोर
पनुन कश्मीर ने अपनी मुख्य मांगों में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की मान्यता, नरसंहार कानून का निर्माण और कश्मीर घाटी में अलग मातृभूमि की स्थापना को शामिल किया है। संगठन ने केंद्र सरकार से कश्मीरी पंडित युवाओं के लिए 15 हजार नौकरियां देने और विस्थापित परिवारों को मिलने वाली मासिक अनुग्रह राशि बढ़ाकर कम से कम 25 हजार रुपये करने की भी मांग की।

अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग
पनुन कश्मीर के संयोजक अग्निशेखर ने कहा कि समुदाय की घाटी में वापसी के लिए अलग मातृभूमि बनाई जानी चाहिए, जिसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी का रास्ता आसान होगा। उन्होंने दावा किया कि समुदाय ने लंबे समय तक हिंसा और विस्थापन का सामना किया है और अलग केंद्र शासित प्रदेश को स्थायी समाधान बताया।

आतंकियों की धमकियों का भी मुद्दा उठाया
पनुन कश्मीर ने घाटी में प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों का भी मुद्दा उठाया। टीटो गंजू ने इस मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की हालिया टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी।

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