जम्मू-कश्मीर: आतंकियों की संपत्ति गिरा गरीबों के लिए घर बनाएं, पूर्व असफर बोले- सरकारों ने दहशतगर्दों को पाला
सेवानिवृत्त कर्नल वीके साही ने कहा कि पिछली सरकारों की वजह से आतंकियों की संपत्तियां अब भी उनके पास हैं क्योंकि सरकारों ने उन्हें पाला है। सरकारें चाहती ही नहीं थी कि इनके ऊपर कोई कार्रवाई हो।
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कश्मीर में आतंकियों की संपत्तियों पर होने वाली कार्रवाई से आतंकवाद की कमर तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। सेना और पुलिस के सेवानिवृत्त लोगों ने कहा कि यह कार्रवाई 30 साल पहले ही हो जानी चाहिए थी। संपत्तियां जब्त करना समस्या का हल नहीं है।
संपत्तियां को क्षतिग्रस्त करके नए ढांचे बनाकर गरीबों को आवंटित कर देने चाहिए। अगर कोई आतंकी पाकिस्तान में है और तो उसकी संपत्ति जब्त करनी चाहिए। सेवानिवृत्त कर्नल वीके साही ने कहा कि पिछली सरकारों की वजह से आतंकियों की संपत्तियां अब भी उनके पास हैं क्योंकि सरकारों ने उन्हें पाला है।
सरकारें चाहती ही नहीं थी कि इनके ऊपर कोई कार्रवाई हो। इसलिए ही तो कोई नियम नहीं बनाया गया। वरना नियम बनते कितना वक्त लगता है। अब भी सरकार ने कदम तो उठाया है, लेकिन इसमें भी कमियां हैं। आधी अधूरी कार्रवाई करने से बात नहीं बनेगी। सरकार को योगी स्टाइल अपनाना पड़ेगा।
आतंकियों की संपत्तियां को सिर्फ जब्त ही नहीं, बल्कि उन्हें क्षतिग्रस्त कर देना चाहिए। इनकी जगह पर नई इमारतें खड़ी कर गरीबों को बांटनी चाहिए। जब्त कर देने से कुछ नहीं होगा। कल को फिर से कश्मीर में पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियों की सरकार आएगी और इनको वापस मिल जाएगी।
बहुत पहले हो जानी चाहिए थी कार्रवाई: जमवाल
सेवानिवृत्त मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल का कहना है कि आतंकियों पर यह कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी। पूर्व की सरकारों ने इन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इन आतंकियों का समर्थन करने वालों की संपत्तियां भी सरकार को अपने कब्जे में लेनी चाहिए थीं।
आतंकवाद का समर्थन करने वालों को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। आगे ही जम्मू कश्मीर में कार्रवाई होने में बहुत साल लग गए हैं।
आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लटरम को 1990 में कंधार कांड में छोड़ा गया था। 30 साल बाद इसकी संपत्ति जब्त की गई है। भारत को इसकी संपत्ति अटैच करते हुए 30 साल लग गए जो कि उसी समय होना चाहिए था। यदि कोई आतंकी इस तरह करता है तो उस पर उसी समय कार्रवाई होना चाहिए। - एसपी वैद, पूर्व डीजीपी