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Jammu News: बरवाल में औद्योगिक इकाई के लिए काटे पेड़ डिप्टी सीएम ने काम रोकने के दिए निर्देश
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बरवाल में अधिकारियों से बात करते उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी। संवाद
- कठुआ के बरवाल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनने पहुंचे सुरिंदर चौधरी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। कंडी के 735 कनाल भूमि पर पेड़ों की कटाई कर औद्योगिक इकाई लगाने के मामले का उपमुख्यमंत्री ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने काम बंद करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि पहले ही अधिकारियों को काम शुरू करने से मना किया था, लेकिन निर्देश का पालन नहीं किया गया। इसकी जांच की जाएगी।
डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि भले ही अन्य अफसरों के तबादले सरकार के हाथ में न हों, लेकिन प्रबंध निदेशक के तबादले उन्हीं के हाथ में हैं। इस बात की जांच की जाएगी कि किसके निर्देश पर यह काम शुरू हुआ। इसकी जवाबदेही उन्होंने सिडको के एमडी की तय करने की बात कही। चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य नहीं केंद्र शासित प्रदेश है, फिर भी कोशिश की जा रही है कि लोगों को सहूलियतें मिलें। पहले योजना बनेगी कि बरवाल में औद्योगिक क्षेत्र की जरूरत है या नहीं।
सरकार गठन से पहले जिन इकाइयों को औद्योगिक पैकेज के तहत राशि दी गई है वो चल भी रहीं हैं या नहीं, यह देखा जाएगा। केवल इंसेंटिव के लिए नहीं, रोजगार के लिए इकाइयां स्थापित होंगी। उपजाऊ भूमि को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। कंडी के 735 कनाल भूमि पर पेड़ों की कटाई कर औद्योगिक इकाई लगाने के मामले का उपमुख्यमंत्री ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने काम बंद करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि पहले ही अधिकारियों को काम शुरू करने से मना किया था, लेकिन निर्देश का पालन नहीं किया गया। इसकी जांच की जाएगी।
डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि भले ही अन्य अफसरों के तबादले सरकार के हाथ में न हों, लेकिन प्रबंध निदेशक के तबादले उन्हीं के हाथ में हैं। इस बात की जांच की जाएगी कि किसके निर्देश पर यह काम शुरू हुआ। इसकी जवाबदेही उन्होंने सिडको के एमडी की तय करने की बात कही। चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य नहीं केंद्र शासित प्रदेश है, फिर भी कोशिश की जा रही है कि लोगों को सहूलियतें मिलें। पहले योजना बनेगी कि बरवाल में औद्योगिक क्षेत्र की जरूरत है या नहीं।
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सरकार गठन से पहले जिन इकाइयों को औद्योगिक पैकेज के तहत राशि दी गई है वो चल भी रहीं हैं या नहीं, यह देखा जाएगा। केवल इंसेंटिव के लिए नहीं, रोजगार के लिए इकाइयां स्थापित होंगी। उपजाऊ भूमि को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
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