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Sunday Special: दशकों बाद पूर्वजों के आशियाने में पहुंचने लगे चीतल
ओमपाल सांब्याल, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 22 May 2016 06:35 PM IST
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युवा चीतल इस आश्रम में अपने पूर्वजों के घर लौटकर खूब इतरा रहे हैं
- फोटो : Amar Ujala
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पहले खैरख्वाह का साया सिर से उठा और उसके बाद अपने घर से बेघर होने के बाद दर्जनों सदस्यों की मौत हो गई। तमाम संघर्षों के बाद चौथी पीढ़ी के युवा चीतल इस आश्रम में अपने पूर्वजों के घर लौटकर खूब इतरा रहे हैं।
चीतल से भावनात्मक रिश्ता रखने वाले स्थानीय लोगों की मांग पर वन्य जीव विभाग आश्रम परिसर के एंक्लोजर में इनकी संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है। उधमपुर जिले के मानतलाई इलाके में स्थित अपर्णा आश्रम के वन्य जीवों की यह मार्मिक कहानी सुखद मोड़ ले रही है।
दरअसल धीरेंद्र ब्रह्मचारी के 1008 कनाल क्षेत्र में फैले अपर्णा आश्रम में वन्य जीवों का बाड़ा दर्जनों सदस्यों से आबाद था। देखने में मनमोहक चीतल हिरन (स्पाटेड डियर) की संख्या इसमें सबसे ज्यादा थी। बरसों बरस वन्य जीवों की खूब सेवा हुई, लेकिन 9 जून 1994 को धीरेंद्र ब्रह्मचारी की हवाई हादसे में मौत से आश्रम उजड़ गया।
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वन्यजीवों का बाड़ा भी इससे अछूता न रह सका। तत्कालीन प्रशासन ने चालीस से अधिक हिरणों के समूह को उधमपुर शिफ्ट करने का प्रयास किया, लेकिन शिफ्टिंग की इस प्रक्रिया के दौरान दर्जनों हिरण मर गए। उधमपुर के टांडे रख में जीवित रहे हिरणों का संरक्षण किया गया। अब जाकर इन हिरणों को फिर से अपर्णा आश्रम के एंक्लोजर में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज हुई है।
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चीतल से भावनात्मक रिश्ता रखने वाले स्थानीय लोगों की मांग पर वन्य जीव विभाग आश्रम परिसर के एंक्लोजर में इनकी संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है। उधमपुर जिले के मानतलाई इलाके में स्थित अपर्णा आश्रम के वन्य जीवों की यह मार्मिक कहानी सुखद मोड़ ले रही है।
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दरअसल धीरेंद्र ब्रह्मचारी के 1008 कनाल क्षेत्र में फैले अपर्णा आश्रम में वन्य जीवों का बाड़ा दर्जनों सदस्यों से आबाद था। देखने में मनमोहक चीतल हिरन (स्पाटेड डियर) की संख्या इसमें सबसे ज्यादा थी। बरसों बरस वन्य जीवों की खूब सेवा हुई, लेकिन 9 जून 1994 को धीरेंद्र ब्रह्मचारी की हवाई हादसे में मौत से आश्रम उजड़ गया।
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वन्यजीवों का बाड़ा भी इससे अछूता न रह सका। तत्कालीन प्रशासन ने चालीस से अधिक हिरणों के समूह को उधमपुर शिफ्ट करने का प्रयास किया, लेकिन शिफ्टिंग की इस प्रक्रिया के दौरान दर्जनों हिरण मर गए। उधमपुर के टांडे रख में जीवित रहे हिरणों का संरक्षण किया गया। अब जाकर इन हिरणों को फिर से अपर्णा आश्रम के एंक्लोजर में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज हुई है।