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बैसाखी पर लगने वाले मेले भी होते जा रहे लुप्त
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सांबा। एक समय था जब बैसाखी पर्व आने पर मेले का आयोजन किया जाता था। किसान खुश होते थे, बैसाखी पर किसान अपनी तैयार गेहूं क ी फसल की कटाई शुरू करते थे। वहीं मेले पर पहुंच कर आनंद लेते थे। अब ऐसी रौनक बैसाखी पर देखने को नहीं मिल रही है। अब तो बैसाखी पर लगने वाले मेले भी लुप्त होते जा रहे हैं।
बुजुर्ग कृष्ण लाल ने बताया कि पहले बैसाखी मेले के लिए सेना में भर्ती जवान छुट्टी लेकर घर पहुंचते थे। प्रत्येक गांव से युवक भंगड़ा लेकर मेला स्थल पहुंचते थे। जिले के मदून के तरेली में धार्मिक स्थल पर मेले का आयोजन किया जाता था। दूर दराज से लोग मेले में पहुंचते थे। अपने-अपने गांव से युवक ढोल की थाप पर भंगड़ा लेकर पहुंचते थे। काफी रौनक बनी रहती थी। दुकानें सजती थीं, मेले के बाद बच्चों के लिए मिठाई लेकर किसान घर पहुंचते थे। पूरा आनंद मिलता था, लेकिन अरसे से मेले का आयोजन बंद कर दिया गया। इस बार जिले के पहाड़ी क्षेत्र गौरण में बाबा शिवो प्रबंधक कमेटी की ओर से बैसाखी पर बाबा की मूर्तियों को पुरमंडल में बैसाखी पर स्नान कराने की योजना बनाई जा रही है।
कमेटी के प्रधान देसराज के अनुसार एक बार फिर से बैसाखी पर्व को मनाया जा रहा है। उधर जिले के सुपवाल के नमंदर में भारत-पाक के बंटवारे से पहले दोनों देशों के लोग बैसाखी मेले में पहुंचते थे। भारत-पाक बंटवारे के बाद मेले का आयोजन बंद कर दिया गया। उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से मेले का आयोजन कराया जाता था। प्रशासन की ओर से सरकारी कार्यक्रम रखा जाने लगा। कलाकारों को भी बैसाखी मेले पर आमंत्रित किया जाता था। काफी संख्या में लोग पहुंचते थे। कोरोना के बाद मेले का आयोजन बंद कर दिया गया। अब एक बार फिर से नमंदर कमेटी के सदस्यों की ओर से बैसाखी मेले का आयोजन कराया जा रहा है।
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बैसाखी को लेकर लोगों में दिख रहा उत्साह
विजयपुर। बैसाखी को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि इस बार बैसाखी धूमधाम से मनाई जाएगी। क्योंकि दो सालों से कोरोना के कारण बैसाखी फीका रही, लेकिन इस बार ढोल नगाड़ों के साथ मनाई जाएगी। बैसाखी पर्व के बाद किसान गेहूं की फसल को काटना शुरू कर देता है। संवाद
प्रवासी मजदूर नहीं मिलने से किसान खुद कर रहे गेहूं फसल की कटाई
अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में किसानों ने गेहूं की फसल की कटाई शुरू कर दी है। कई जगहों पर प्रवासी मजदूर नहीं मिलने पर किसान खुद ही कटाई कर रहे हैं। ऐसे में भूमि मालिकों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है।
कंडी क्षेत्र की कई पंचायतों में किसानों ने गेहूं की फसल की कटाई शुरू कर दी है। कंडी क्षेत्र में भूमि पथरीली होने पर किसान खुद ही फसल की कटाई करते हैं। मगर मैदानी क्षेत्र में बड़ी कम संख्या में प्रवासी मजदूर मिलने पर पर किसान परिवार के सदस्यों के साथ कटाई में जुटे हैं। संवाद
फसल के बीमे का मुआवजा कम मिलने से किसानों में रोष
रामगढ़। क्षेत्र में पिछले साल किसानों की ओलावृष्टि से धान की फसल खराब होने का मुआवजा मंगलवार को किसानों को मिला। किसानों के अनुसार उन्हें लागत से काफी कम मुआवजा मिला है, उनमें काफी रोष व्याप्त है।
किसानों का कहना है कि हमारी धान की फसल का नुकसान 90 फीसदी हुआ। बीमा कंपनी ने 80 फीसदी नुकसान का मुआवजा देने को कहा था, लेकिन अब 40 से 45 फीसदी मुआवजा दिया गया है। किसानों का कहना है कि हमें ट्रैक्टर, केसीसी और अन्य कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसान देविंदर चौधरी (पप्पू), बाबू रोशन, किसान नेता विजय चौधरी, टिंकू चौधरी, पंच कर्नल सिंह, बाबा चौधरी, मोहन सिंह भट्टी, सरदार सुरजीत सिंह ने कहां कि हमें कंपनी से उम्मीद से बहुत कम पैसे मिले हैं। हम उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द इन कंपनियों से पूछताछ की जाए, ताकि हमारे बार्डर क्षेत्र के को इंसाफ मिले। संवाद
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बुजुर्ग कृष्ण लाल ने बताया कि पहले बैसाखी मेले के लिए सेना में भर्ती जवान छुट्टी लेकर घर पहुंचते थे। प्रत्येक गांव से युवक भंगड़ा लेकर मेला स्थल पहुंचते थे। जिले के मदून के तरेली में धार्मिक स्थल पर मेले का आयोजन किया जाता था। दूर दराज से लोग मेले में पहुंचते थे। अपने-अपने गांव से युवक ढोल की थाप पर भंगड़ा लेकर पहुंचते थे। काफी रौनक बनी रहती थी। दुकानें सजती थीं, मेले के बाद बच्चों के लिए मिठाई लेकर किसान घर पहुंचते थे। पूरा आनंद मिलता था, लेकिन अरसे से मेले का आयोजन बंद कर दिया गया। इस बार जिले के पहाड़ी क्षेत्र गौरण में बाबा शिवो प्रबंधक कमेटी की ओर से बैसाखी पर बाबा की मूर्तियों को पुरमंडल में बैसाखी पर स्नान कराने की योजना बनाई जा रही है।
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कमेटी के प्रधान देसराज के अनुसार एक बार फिर से बैसाखी पर्व को मनाया जा रहा है। उधर जिले के सुपवाल के नमंदर में भारत-पाक के बंटवारे से पहले दोनों देशों के लोग बैसाखी मेले में पहुंचते थे। भारत-पाक बंटवारे के बाद मेले का आयोजन बंद कर दिया गया। उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से मेले का आयोजन कराया जाता था। प्रशासन की ओर से सरकारी कार्यक्रम रखा जाने लगा। कलाकारों को भी बैसाखी मेले पर आमंत्रित किया जाता था। काफी संख्या में लोग पहुंचते थे। कोरोना के बाद मेले का आयोजन बंद कर दिया गया। अब एक बार फिर से नमंदर कमेटी के सदस्यों की ओर से बैसाखी मेले का आयोजन कराया जा रहा है।
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बैसाखी को लेकर लोगों में दिख रहा उत्साह
विजयपुर। बैसाखी को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि इस बार बैसाखी धूमधाम से मनाई जाएगी। क्योंकि दो सालों से कोरोना के कारण बैसाखी फीका रही, लेकिन इस बार ढोल नगाड़ों के साथ मनाई जाएगी। बैसाखी पर्व के बाद किसान गेहूं की फसल को काटना शुरू कर देता है। संवाद
प्रवासी मजदूर नहीं मिलने से किसान खुद कर रहे गेहूं फसल की कटाई
अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में किसानों ने गेहूं की फसल की कटाई शुरू कर दी है। कई जगहों पर प्रवासी मजदूर नहीं मिलने पर किसान खुद ही कटाई कर रहे हैं। ऐसे में भूमि मालिकों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है।
कंडी क्षेत्र की कई पंचायतों में किसानों ने गेहूं की फसल की कटाई शुरू कर दी है। कंडी क्षेत्र में भूमि पथरीली होने पर किसान खुद ही फसल की कटाई करते हैं। मगर मैदानी क्षेत्र में बड़ी कम संख्या में प्रवासी मजदूर मिलने पर पर किसान परिवार के सदस्यों के साथ कटाई में जुटे हैं। संवाद
फसल के बीमे का मुआवजा कम मिलने से किसानों में रोष
रामगढ़। क्षेत्र में पिछले साल किसानों की ओलावृष्टि से धान की फसल खराब होने का मुआवजा मंगलवार को किसानों को मिला। किसानों के अनुसार उन्हें लागत से काफी कम मुआवजा मिला है, उनमें काफी रोष व्याप्त है।
किसानों का कहना है कि हमारी धान की फसल का नुकसान 90 फीसदी हुआ। बीमा कंपनी ने 80 फीसदी नुकसान का मुआवजा देने को कहा था, लेकिन अब 40 से 45 फीसदी मुआवजा दिया गया है। किसानों का कहना है कि हमें ट्रैक्टर, केसीसी और अन्य कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसान देविंदर चौधरी (पप्पू), बाबू रोशन, किसान नेता विजय चौधरी, टिंकू चौधरी, पंच कर्नल सिंह, बाबा चौधरी, मोहन सिंह भट्टी, सरदार सुरजीत सिंह ने कहां कि हमें कंपनी से उम्मीद से बहुत कम पैसे मिले हैं। हम उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द इन कंपनियों से पूछताछ की जाए, ताकि हमारे बार्डर क्षेत्र के को इंसाफ मिले। संवाद