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आज की मित्रता केवल लोभ स्वार्थ पर आधारित रह गई
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प्रवचन देते संत सुभाष शास्त्री
- फोटो : RSPURA
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आरएस पुरा। गांव दबलैड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा शुक्रवार को भंडारे के साथ संपन्न हुई। कथा के अंतिम दिन सुबह हवन यज्ञ किया गया, जिसमें मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां डाल देश व दुनिया में शांति की स्थापित करने के साथ कोरोना को दूर करने की भगवान से प्रार्थना की गई।
इस मौके पर संत सुभाष शास्त्री ने प्रवचन में श्रद्धालुओं को बताया श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का वर्णन किया गया। आज की मित्रता केवल लोभ स्वार्थ पर आधारित रह गई है। अच्छे सच्चे मन से मित्रता करने वाले से भगवान भी खुश रहते हैं। भगवान कृष्ण सुदामा की मित्रता के बारे में अनेक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शुद्ध आचरण से की गई मित्रता का कोई मोल नहीं होता। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान कृष्ण ने सुदामा के प्रति अपनी मित्रता याद रखी। सुदामा उनकी पत्नी गरीबी में दिन गुजारते रहे। सुदामा को एक दिन अपने मित्र श्रीकृष्ण की याद आई। वह भिक्षा में चावल लाए एवं पोटली में बांधकर मित्र से मिलने चल पड़े। वहां पहुंचने पर सुदामा को द्वारपाल ने रोक लिया। सुदामा के कहने पर एक द्वारपाल श्रीकृष्ण के पास गया एवं उन्हें सुदामा के बारे में बताया। सुदामा का नाम सुनते ही भगवान श्रीकृष्ण की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे खुद द्वार पर चले गए। इसके बाद उन्होंने सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाया और उनके पैर धोए एवं पैर में लगे कांटे को निकाला।
कथा वाचक ने आगे बताया कि कृष्ण ने पोटली लेकर उसे खोली एवं मित्र द्वारा लाए गए कच्चे चावल चबा गए। उन्होंने कहा कि लोभ रखने वाले प्राणियों को धर्म के साथ मित्रता निभानी चाहिए, जिससे सबका भला हो सके। इस दौरान पूर्व मंत्री शाम लाल शर्मा व भाजपा के प्रवक्ता एडवोकेट अभिनव शर्मा, महंत राजेश गिरी ने कथा का रसपान करने के साथ माथा टेका व आशीर्वाद लिया।
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पंचवटी के महंत शाम गीरी, ओम प्रकाश ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कराने का मकसद सभी वर्ग के लोगों को धर्म के मार्ग पर लाए जाने के साथ देश व दुनिया में फैली कोरोना महामारी को दूर करना है, ताकि सभी प्राणियों का भला हो सके। बाद दोपहर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें पहुंचे भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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इस मौके पर संत सुभाष शास्त्री ने प्रवचन में श्रद्धालुओं को बताया श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का वर्णन किया गया। आज की मित्रता केवल लोभ स्वार्थ पर आधारित रह गई है। अच्छे सच्चे मन से मित्रता करने वाले से भगवान भी खुश रहते हैं। भगवान कृष्ण सुदामा की मित्रता के बारे में अनेक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शुद्ध आचरण से की गई मित्रता का कोई मोल नहीं होता। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान कृष्ण ने सुदामा के प्रति अपनी मित्रता याद रखी। सुदामा उनकी पत्नी गरीबी में दिन गुजारते रहे। सुदामा को एक दिन अपने मित्र श्रीकृष्ण की याद आई। वह भिक्षा में चावल लाए एवं पोटली में बांधकर मित्र से मिलने चल पड़े। वहां पहुंचने पर सुदामा को द्वारपाल ने रोक लिया। सुदामा के कहने पर एक द्वारपाल श्रीकृष्ण के पास गया एवं उन्हें सुदामा के बारे में बताया। सुदामा का नाम सुनते ही भगवान श्रीकृष्ण की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे खुद द्वार पर चले गए। इसके बाद उन्होंने सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाया और उनके पैर धोए एवं पैर में लगे कांटे को निकाला।
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कथा वाचक ने आगे बताया कि कृष्ण ने पोटली लेकर उसे खोली एवं मित्र द्वारा लाए गए कच्चे चावल चबा गए। उन्होंने कहा कि लोभ रखने वाले प्राणियों को धर्म के साथ मित्रता निभानी चाहिए, जिससे सबका भला हो सके। इस दौरान पूर्व मंत्री शाम लाल शर्मा व भाजपा के प्रवक्ता एडवोकेट अभिनव शर्मा, महंत राजेश गिरी ने कथा का रसपान करने के साथ माथा टेका व आशीर्वाद लिया।
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पंचवटी के महंत शाम गीरी, ओम प्रकाश ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कराने का मकसद सभी वर्ग के लोगों को धर्म के मार्ग पर लाए जाने के साथ देश व दुनिया में फैली कोरोना महामारी को दूर करना है, ताकि सभी प्राणियों का भला हो सके। बाद दोपहर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें पहुंचे भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया।