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हिंदी से रंगमंच में आया निखार, युवा रंगकर्मियों को मिला रोजगार
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जम्मू। हिंदी देश को एक सूत्र में बांधने वाली भाषा है, जो क्षेत्रीय भाषाओं के लिए सेतु का भी काम कर रही है। जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हिंदी भी नई उड़ान छूने को अग्रसर है। रंगमंच में डोगरी, कश्मीरी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ हिंदी आगे बढ़ रही है। हिंदी से रंगमंच में निखार आया है। युवा पीढ़ी हिंदी रंगमंच में अभिनय से दर्शकों तक अपनी बात को बड़ी सरलता से पहुंचा रही है। राष्ट्रभाषा होने के नाते हिंदी को बढ़ावा देने की जरूरत है।
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क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ राष्ट्रभाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। रंगकर्मी होने के नाते में क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ हिंदी में लिखे नाटकों में काम करता हूं। हिंदी से अपनी बात को ज्यादा सहजता से दर्शकों के बीच रख पाता हूं। रंगमंच से हिंदी को बढ़ावा देने के लिए नए नाटकों का लिखा जाना और अभिनय किया जाना जरूरी है। हिंदी के नए लेखकों द्वारा लिखे नाटकों पर अभिनय किया जाना चाहिए।
- आदित्य भारती, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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रंगकर्मी होने के नाते काफी भाषाओं में अभिनय किया, लेकिन हिंदी भाषा के नाटक में अभिनय करने पर अपनापन महसूस होता है। जम्मू-कश्मीर या इसके बाहर किए हिंदी नाटकों में दर्शकों का काफी प्रेम मिला है। हिंदी लोगों को जोड़ने का काम करती है। ये हमारी राष्ट्र भाषा है, जिसे हमें अपनी क्षेत्रीय भाषा के साथ प्रोत्साहन देना होगा। घर से शुरूआत करनी होगी। बच्चों को हिंदी के साथ जोड़ना होगा।
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निहारिका साक्षी, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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जम्मू में बोली जाने वाली हिंदी में क्षेत्रीय भाषा के उच्चारण आते हैं और यही हमारी पहचान भी है। रंगमंच के माध्यम से हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी में लिखे नाटक, कतिवाएं, रचनाएं, अनुवाद कार्य को पढ़ना जरूरी है। युवा रंगकर्मी हिंदी के बड़े और प्रभावशाली लेखकों की लेखन शैली को पढ़ेंगे तभी उसमें भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान बढ़ेगा। उच्चारण में सुधार होगा। हिंदी को तभी बढ़ावा मिलेगा, जब हम हिंदी लेखन को पढ़ेंगे।
- कर्ण, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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जम्मू में हिंदी से रंगमंच को बढ़ावा मिल रहा है। यहां होने वाले थियेटर फेस्टिवल में हिंदी के नाटक का क्षेत्रीय भाषाओं के नाटकों से ज्यादा मंचन हो रहा है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसको पढ़ना जरूरी है। मातृभाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। पांच वर्षों से रंगमंच से जुड़ा हूं। हिंदी रंगमंच में काफी काम हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में इसे और बढ़ाने की जरूरत है।
अक्षय, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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युवा पीढ़ी राष्ट्रभाषा से दूर होता जा रही है। इनमें भाषा के प्रति गलत धारणा को विकसित किया गया है, जिसे बदलने की जरूरत है। रंगमंच भाषा को बढ़ावा देने का काम करता है, जिसमें एक अभिनेता अपनी बात बड़े ही आसान शब्दों में अपने दर्शकों तक पहुंचाता है। हिंदी राष्ट्र भाषा है, जो लोगों की जोड़ने का काम करती है। हिंदी को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय भाषाओं का भी विकास होगा।
- अमनदीप शर्मा, युवा रंगकर्मी
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क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ राष्ट्रभाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। रंगकर्मी होने के नाते में क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ हिंदी में लिखे नाटकों में काम करता हूं। हिंदी से अपनी बात को ज्यादा सहजता से दर्शकों के बीच रख पाता हूं। रंगमंच से हिंदी को बढ़ावा देने के लिए नए नाटकों का लिखा जाना और अभिनय किया जाना जरूरी है। हिंदी के नए लेखकों द्वारा लिखे नाटकों पर अभिनय किया जाना चाहिए।
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- आदित्य भारती, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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रंगकर्मी होने के नाते काफी भाषाओं में अभिनय किया, लेकिन हिंदी भाषा के नाटक में अभिनय करने पर अपनापन महसूस होता है। जम्मू-कश्मीर या इसके बाहर किए हिंदी नाटकों में दर्शकों का काफी प्रेम मिला है। हिंदी लोगों को जोड़ने का काम करती है। ये हमारी राष्ट्र भाषा है, जिसे हमें अपनी क्षेत्रीय भाषा के साथ प्रोत्साहन देना होगा। घर से शुरूआत करनी होगी। बच्चों को हिंदी के साथ जोड़ना होगा।
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निहारिका साक्षी, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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जम्मू में बोली जाने वाली हिंदी में क्षेत्रीय भाषा के उच्चारण आते हैं और यही हमारी पहचान भी है। रंगमंच के माध्यम से हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी में लिखे नाटक, कतिवाएं, रचनाएं, अनुवाद कार्य को पढ़ना जरूरी है। युवा रंगकर्मी हिंदी के बड़े और प्रभावशाली लेखकों की लेखन शैली को पढ़ेंगे तभी उसमें भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान बढ़ेगा। उच्चारण में सुधार होगा। हिंदी को तभी बढ़ावा मिलेगा, जब हम हिंदी लेखन को पढ़ेंगे।
- कर्ण, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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जम्मू में हिंदी से रंगमंच को बढ़ावा मिल रहा है। यहां होने वाले थियेटर फेस्टिवल में हिंदी के नाटक का क्षेत्रीय भाषाओं के नाटकों से ज्यादा मंचन हो रहा है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसको पढ़ना जरूरी है। मातृभाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। पांच वर्षों से रंगमंच से जुड़ा हूं। हिंदी रंगमंच में काफी काम हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में इसे और बढ़ाने की जरूरत है।
अक्षय, युवा रंगकर्मी, जम्मू
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युवा पीढ़ी राष्ट्रभाषा से दूर होता जा रही है। इनमें भाषा के प्रति गलत धारणा को विकसित किया गया है, जिसे बदलने की जरूरत है। रंगमंच भाषा को बढ़ावा देने का काम करता है, जिसमें एक अभिनेता अपनी बात बड़े ही आसान शब्दों में अपने दर्शकों तक पहुंचाता है। हिंदी राष्ट्र भाषा है, जो लोगों की जोड़ने का काम करती है। हिंदी को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय भाषाओं का भी विकास होगा।
- अमनदीप शर्मा, युवा रंगकर्मी