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सूडान में जम्मू-कश्मीर का जवान शहीद, पार्थिव शरीर पहुंचते ही माहौल हुआ गमगीन

Sat, 14 Dec 2019 01:09 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 14 Dec 2019 01:09 AM IST
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Jammu and Kashmir soldier martyred in Sudan
पार्थिव शरीर पहुंचते ही माहौल हुआ गमगीन - फोटो : अमर उजाला

20 जैक राइफल के हवलदार तरसेम लाल मनोत्रा की सात दिसंबर को सूडान में तैनाती के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार को देविका घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जानकारी अनुसार हवलदार तरसेम लाल इंडियन आर्मी की 20 जम्मू कश्मीर राइफल्स में तैनात थे और मौजूदा समय में इंडियन आर्मी की तरफ से सूडान में तैनात थे।  

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सूडान से तरसेम का पार्थिव शरीर जहाज से दिल्ली लाया गया। उसके बाद सैन्य अधिकारी पार्थिव शरीर लेकर विजयपुर पहुंचे। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा तो पैतृक गांव अबताल छन्नी और मौजूद समय में विजयपुर स्थित घर में माहौल गमगीन हो गया। इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। विजयपुर के सपूत की शहादत की खबर से आस पड़ोस व परिचितों का शहीद के घर में जमावड़ा लगना शुरू हो गया।
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शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे तिरंगे में लपेटकर तरसेम को लेकर आर्मी के जवान जैसे ही पहुंचे तो हर तरफ चीख पुकार मच गई। हर कोई तरसेम को आवाज लगा रहा था। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन हो गया। इस करूण-कंदन के बीच हर किसी की आंखें नम हो गई।

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क्या पता था कि तरसेम तिरंगे में लिपटकर घर आएगा

जन सैलाब के बीच घर से करीब 12 बजे शहीद की शव यात्रा निकली और श्मशान घाट पर पहुंची। यहां इंडियन आर्मी के मेजर पंकज कुमार ने शहीद तरसेम लाल को सलामी दी। वहीं माता-पिता, भाई-बहन व स्थानीय लोगों ने भी पुष्प अर्पित किए। बाद में जन सैलाब के बीच श्मशान घाट पर सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टि कर दी गई। मौके पर सेना के जवानों ने राउंड फायर कर शहीद को अंतिम विदाई दी। शहीद के बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी।

तरसेम के परिवार के एक सदस्य ने बताया की तरसेम में देश सेवा का जज्बा बचपन से था। यही वजह थी कि तरसेम ने सेना में शामिल होकर देश की सेवा को प्राथमिकता दी। तरसेम परिवार से मिलने सूडान से जल्दी आने वाला था। पूरा परिवार शहीद तरसेम की सलामत की आस लगाए बैठा था। उन्हें क्या पता था कि वह तिरंगे में लिपटकर घर आएगा।

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