फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jailer rajni doesn't get anticipatory bail

जेल में हेराफेरी करने वाली जेलर रजनी को राहत नहीं

Wed, 24 Jun 2015 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 24 Jun 2015 10:47 PM IST
विज्ञापन
jailer rajni doesn't get anticipatory bail

उधमपुर जेल की सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल को गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने से वेकेशन सेशन जज (जम्मू) वाईपी कोतवाल ने इंकार कर दिया। जेलर पर आरोप है कि कोट भलवाल स्थित सेंट्रल जेल में खुदाई के दौरान कैदियों को मिले प्राचीन सिक्कों में हेराफेरी की। क्राइम ब्रांच ने गृह विभाग से संवाद मिलने और डीजी जेल की सिफारिशों के आधार पर रजनी सहगल, चक्कर हवलदार रवि कुमार, मोहन लाल और सुमल कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया था।

विज्ञापन


क्राइम ब्रांच की ओर से की गई जांच के दौरान पाया गया कि सितंबर, 2012 में खेती के लिए जेल के अंदर खुदाई के दौरान कैदियों को 450 से 500 सिक्कों से भरा एक मिट्टी का मटका (कुज्जा) मिला। सिक्कों को साफ किए जाने के दौरान उसमें सोने जैसी चमक देखी गई। कैदियों ने प्राचीन सिक्कों को हवलदार रवि कुमार और मदन लाल के सुपुर्द कर दिया। उन्होंने उक्त सामान जेल सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल को दे दिया।
विज्ञापन


इसी बीच, सिक्के मिलने की खबर लीक हो गई। जेल के उच्चाधिकारियोें ने नवंबर 2012 में मामले की जांच के आदेश दिए। जांच में पाया गया कि जेल सुपरिंटेेंडेंट के निर्देश पर हवलदार रवि कुमार, मोहन लाल और सुमन कुमार ने कैदियों को धमकी दी कि यदि किसी ने सिक्के मिलने की सही तिथि और संख्या बताई तो उनके रिकार्ड में ‘रेड एंट्री’ कर दी जाएगी, जिससे उनकी रिहाई का रिकार्ड खराब हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कैदियों को टार्चर किया गया कि वे यह बयान दें कि सिक्के सितंबर नहीं, बल्कि दीवाली के करीब नवंबर में मिले थे। इनकी संख्या मात्र सौ थी। जांच में पता चला कि उक्त सिक्के मोहम्मद गौरी, बलवान, अलाउद्दीन खिलजी के शासन के दौरान उपयोग होते थे। सिक्के सोने और तांबे के थे। जेल सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल ने जान बूझकर मामले में चुप्पी साधी और अपने सीनियर अफसरों या संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को रिकवरी की सूचना नहीं दी।

जबकि दि ट्रेजर ट्रोव एक्ट के तहत यह आवश्यक होता है। मामले की जांच शुरू होने के बाद सहगल ने बताया कि नवंबर 2012 में कुल 107 सिक्के मिले थे। आरोप है कि उन्होंने फर्जी रिकार्ड तैयार किया और उसमें रिकवरी की गलत तिथि और समय अंकित किया। साथ ही हड़बड़ी में बरामद सिक्कों को अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय के निदेशक को सौंप दिया, ताकि अपनी गलतियों को छुपाया जा सके। क्राइम ब्रांच के अनुसार यह सब जेल सुपरिंटेंडेंट ने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मिलकर किया और अपने पद का दुरुपयोग किया।


इसी आधार पर क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 420, 409, 465, 466, 467, 468, 471 और 120-बी के अलावा ट्रेजर ट्रोव एक्ट की धारा 5/24 के तहत एफआईआर दर्ज की। अदालत ने जमानत अर्जी पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट सीआरपीसी की धारा 497-ए के विवेकादीन अधिकार का उपयोग करते हुए गिरफ्तारी पूर्व जमानत नहीं दे सकती। साथ ही अदालत ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। जेएनएफ

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed