{"_id":"21980df1b82b766a337384897cd77793","slug":"ca-pd-official-convicted-for-corruption-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएपीडी के सुपरवाइजर को तीन साल की सजा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सीएपीडी के सुपरवाइजर को तीन साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 03 Dec 2015 08:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीएपीडी के जैनापोरा सर्किल
विज्ञापन
(शोपियां) के तत्कालीन सुपरवाइजर मोहम्मद मंसूर मलिक को भ्रष्टाचार निरोध
अतिरिक्त जज (पुलवामा) ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा और 25 हजार
रुपये जुर्माना लगाया है।
पांच अगस्त 2009 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निरोधक कोर्ट) श्रीनगर के आदेश पर विजिलेंस आर्गनाइजेशन श्रीनगर ने आरोपी मंसूर मलिक के खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्त होने का केस दर्ज किया।
शोपियां के रेशीपोरा निवासी साबजार अहमद डार ने शिकायत में कहा कि वह 2007 से रेशीपोरा में सीएपीडी विभाग की फेयर प्राइज शाप चला रहा है। आरोप है कि मंसूर मलिक ने विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर की ओर से दिए गए एक मामले में विभिन्न रिपोर्ट जारी करने के लिए उससे दस हजार रुपये रिश्वत ली।
विजिलेंस ने सबूतों और बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रारंभिक स्तर पर केस दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच पूरी करने के बाद विजिलेंस ने अदालत में चालान पेश किया।
भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी पर लगे तमाम आरोपों को सही पाया और उसे पीसी एक्ट के तहत दो साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
पांच अगस्त 2009 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निरोधक कोर्ट) श्रीनगर के आदेश पर विजिलेंस आर्गनाइजेशन श्रीनगर ने आरोपी मंसूर मलिक के खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्त होने का केस दर्ज किया।
शोपियां के रेशीपोरा निवासी साबजार अहमद डार ने शिकायत में कहा कि वह 2007 से रेशीपोरा में सीएपीडी विभाग की फेयर प्राइज शाप चला रहा है। आरोप है कि मंसूर मलिक ने विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर की ओर से दिए गए एक मामले में विभिन्न रिपोर्ट जारी करने के लिए उससे दस हजार रुपये रिश्वत ली।
विजिलेंस ने सबूतों और बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रारंभिक स्तर पर केस दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच पूरी करने के बाद विजिलेंस ने अदालत में चालान पेश किया।
भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी पर लगे तमाम आरोपों को सही पाया और उसे पीसी एक्ट के तहत दो साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया।