बार्डर पर बीएसएफ के जवान के शव के साथ कायरतापूर्ण हरकत की साजिश कई दिन से चली आ रही थी। यूं कहा जाए कि दस दिन के भीतर इसका तानाबाना बुना गया। पाकिस्तानी रेंजर लगातार इस पर नजर रख रहे थे। इसलिए उन्होंने ऐसे इलाके को चुना, यहां पर घना सरकंडा और दलदल वाला स्थान था। उन्हें इन तीन बातों की बौखलाहट थी।
करीब दस दिन पहले भी पाकिस्तानी रेंजरों ने बीएसएफ के काम को प्रभावित किया था। अब भी यह तब हुआ है, जब बीएसएफ की तरफ से अपना रूटीन काम किया जा रहा था। यह कहना गलता नहीं होगा कि पाकिस्तानी रेंजरों ने बीएसएफ के रुटीन कार्यों की पूरी तरह से रेकी करने के बाद इस घटना को अंजाम दिया है। दस दिन पहले रामगढ़ सेक्टर में बीएसएफ की तरफ से एंटी फ्लड बाढ़ का मरम्मत कार्य चल रहा था, लेकिन पाकिस्तानी रेंजरों ने इसका विरोध करते हुए काम रुकवा दिया।
दोनों तरफ इसे लेकर तनाव पैदा हो गया। खुद बीएसएफ के आईजी राम अवतार अमर उजाला से बातचीत में इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने बताया था कि हमारी तरफ से एंटी फ्लड बाढ़ का मरम्मत कार्य चल रहा था। पाकिस्तानी रेंजरों को कुछ आपत्ति थी। उनसे बातचीत शुरू करने के बाद फिर से काम शुरू कर दिया।
इन तीन बातों की थी बौखलाहट
1- लेजर फेंसिंग की बौखलाहट
बीएसएफ की तरफ से इंटरनेशनल बार्डर पर लेजर फेंसिंग बनाई गई है। जो पाकिस्तानी रेंजरों की बौखलाहट का एक कारण है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बार्डर पर जाने के अगले ही दिन इस तरह की घटना का होना इस बात का प्रमाण है।
सब देखता है पाकिस्तान, दिखता कुछ नहीं
जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी की तरफ से अपनी तरफ ऊंचे बांध बना रखे हैं। उनकी तरफ क्या कुछ चल रहा है, इसका कुछ पता नहीं चलता, लेकिन हमारी तरफ होने वाली गतिविधियों की उन्हें जानकारी रहती है। बीएसएफ ने खुद अपने बयान में बताया कि पाकिस्तान की तरफ सुरक्षित बांध बना हुआ था। जबकि घटनास्थल पर सरकंडा, दलदल जैसी जगह थी। इस वजह से जब जवान को गोली लगी तो वह वहां गिर गया। इस वजह से उसे तत्काल नहीं उठाया जा सका।