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करोड़ों रुपये के ऋण धोखाधड़ी में मामला दर्ज
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जम्मू। एंटी क्रप्शन ब्यूरो (एसीबी) जम्मू ने जेएंडके बैंक में बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में औपचारिक कार्रवाई शुरू करते हुए बैंक के प्रबंधन, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एसीबी ने संबंधित ठिकानों पर दबिश देकर दस्तावेजों की जांच की।
एसीबी की संयुक्त जांच में एम/एस पैराडाइस अवैन्यू को 2012-2017 की अवधि में दिए गए ऋण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। शिकायत में पाया गया है कि संबंधित फर्म ने बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से जेएंडके बैंक न्यू यूनिवर्सिटी कैंपस जम्मू शाखा से मंजूर हुए 74.27 करोड़ रुपये ऋण को धोखाधड़ी से 177.68 करोड़ रुपये तक ले लिया। लेकिन निर्धारित किश्तें नहीं दी और उसे एनपीए घोषित किया गया। मामले के अनुसार ऋण को नरवाल में ईडन एंड जायन नाम के कांप्लेक्स में 52 प्लैट बनाने के लिए लिया गया था। ऋण को 30-1-2012 को मंजूर किया गया और इसे चरणबद्ध जारी किया जाना था। इस मामले में संबंधित फर्म की ओर से अन्य लोगों से 30 कनाल भूमि को खरीदा दिया। लेकिन मिलीभगत से ऋण को बढ़ाकर 177.68 करोड़ रुपये तक कर लिया गया। सितंबर 2017 में र्क्वाटरली किश्त में 11.27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था, लेकिन संबंधित फर्म भुगतान करने में विफल रहा और ऋण को एनपीए घोषित कर दिया गया। मामले में पाया गया कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर ऋण में धोखाधड़ी नहीं की जा सकती है। एसीबी की टीम ने विभिन्न स्थानों पर ऋण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है। इसमें व्यक्तिगत और कंपनी के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई। इसमें लैपटाप व अन्य दस्तावेज सीज किए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है।
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एसीबी की संयुक्त जांच में एम/एस पैराडाइस अवैन्यू को 2012-2017 की अवधि में दिए गए ऋण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। शिकायत में पाया गया है कि संबंधित फर्म ने बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से जेएंडके बैंक न्यू यूनिवर्सिटी कैंपस जम्मू शाखा से मंजूर हुए 74.27 करोड़ रुपये ऋण को धोखाधड़ी से 177.68 करोड़ रुपये तक ले लिया। लेकिन निर्धारित किश्तें नहीं दी और उसे एनपीए घोषित किया गया। मामले के अनुसार ऋण को नरवाल में ईडन एंड जायन नाम के कांप्लेक्स में 52 प्लैट बनाने के लिए लिया गया था। ऋण को 30-1-2012 को मंजूर किया गया और इसे चरणबद्ध जारी किया जाना था। इस मामले में संबंधित फर्म की ओर से अन्य लोगों से 30 कनाल भूमि को खरीदा दिया। लेकिन मिलीभगत से ऋण को बढ़ाकर 177.68 करोड़ रुपये तक कर लिया गया। सितंबर 2017 में र्क्वाटरली किश्त में 11.27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था, लेकिन संबंधित फर्म भुगतान करने में विफल रहा और ऋण को एनपीए घोषित कर दिया गया। मामले में पाया गया कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर ऋण में धोखाधड़ी नहीं की जा सकती है। एसीबी की टीम ने विभिन्न स्थानों पर ऋण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है। इसमें व्यक्तिगत और कंपनी के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई। इसमें लैपटाप व अन्य दस्तावेज सीज किए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है।
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