फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   डीजीपी आवास पर घायल कांस्टेबल ने दम तोड़ा

डीजीपी आवास पर घायल कांस्टेबल ने दम तोड़ा

Wed, 21 Nov 2018 11:51 AM IST
Updated Wed, 21 Nov 2018 11:51 AM IST
विज्ञापन
डीजीपी आवास पर घायल कांस्टेबल ने दम तोड़ा
जम्मू। डीजीपी के आवास पर गोलियां चलने से घायल हेड कांस्टेबल सुभाष शर्मा ने मंगलवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना के बाद से ही उसकी हालत नाजुक थी। आधा दर्जन गोलियों ने उसे छलनी कर दिया था। डाक्टरों ने गोलियां तो निकाल दी थीं, लेकिन उसे वेंटिलेटर पर रखा था। सुभाष के परिवार वालों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विज्ञापन

हेड कांस्टेबल सुभाष शर्मा आईआरपी की 12 बटालियन में तैनात था। वह बिक्रम चौक स्थित डीजीपी के आवास पर गारद का इंचार्ज था। सोमवार को उसने सुबह अपनी कारबाइन राइफल से खुद को गोली मार ली थी। कई गोलियां चली थीं। इससे उसका सीना छलनी हो गया था। उसे जीएमसी में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन

डाक्टरों की विशेष टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया। इस मौके पर परिवार के लोग भी मौजूद रहे। परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह खुदकुशी है। इसलिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार पुलिस ने फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम करवाया है। इसके लिए पुलिस ने जिला उपायुक्त से मंजूरी ली। मंगलवार देर शाम को सुभाष का संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर पुलिस के कई सीनियर अधिकारी मौजूद रहे।

गारद में शामिल अन्य कर्मियों के बयान लिए
पुलिस की टीम ने डीजीपी कार्यालय में तैनात पुलिस की गारद में शामिल कर्मियों के बयान रिकार्ड किए हैं। साथ ही उसके परिवार से भी बात करने की कोशिश की। आवास पर लगे सीसीटीवी के फुटेज लिए। मृतक के मोबाइल फोन की काल डिटेल भी चेक की जा रही है। यह बात भी सामने आ चुकी है कि मरने से पहले उसने अपनी पत्नी के साथ बात की थी और दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी भी हुई।


एयरलिफ्ट करते, तो शायद बच जाती जान
हेड कांस्टेबल को अपनी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति अवार्ड भी मिल चुका है। मंगलवार को अस्पताल पहुंचे सुभाष के भाई, बहन और अन्य सदस्यों को इस बात का मलाल है कि अगर पुलिस प्रशासन की तरफ से उसे एयरलिफ्ट कर किसी बड़े अस्पताल में पहुंचाया जाता, तो शायद उसकी जान बच जाती। परिवार को यह भी मलाल है कि पोस्टमार्टम के वक्त अस्पताल में पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। परिवार की तरफ से पुलिस से यह भी मांग की गई है कि मृतक की बेटी को नौकरी दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed